नई दिल्ली : बीजेपी लंबे समय से ‘एक देश, एक चुनाव’ की वकालत करती रही है। 2014 में बीजेपी के केंद्र के सत्ता में आने के बाद से ही इस मुद्दे ने जोर पकड़ा और अटकलें लगाई गईं कि देश में आम चुनाव विभिन्न राज्यों में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों के साथ ही संपन्न कराए जा सकते हैं। हालांकि ऐसी अटकलें निराधार साबित हुईं, जब देश में 2019 के आम चुनाव विधानसभा चुनावों से अलग हुए।
‘एक देश एक चुनाव’ का मुद्दा एक बार फिर गरमाया है, जब बीजेपी 2019 के लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के साथ केंद्र की सत्ता में लगातार दूसरी बार पहुंची है। अब तक विपक्षी दलों के विरोध के कारण यह मुद्दा कहीं दबा पड़ा था। सरकार ने साफ कर दिया था कि इस बारे में कोई भी फैसला सभी दलों के सलाह-मशविरे से ही लिया जाएगा। अब सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों की बैठक बुलाई है।
इस बैठक में ‘एक देश एक चुनाव’ से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक देश एक चुनाव’ के मुद्दे पर 19 जून को उन राजनीतिक दलों के अध्यक्षों की बैठक बुलाई है, जिनका संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा में प्रतिनिधित्व है। यह बैठक संसद परिसर में होगी।
यहां उल्लेखनीय है कि बीजेपी और पीएम मोदी जहां लोकसभा और विधनसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने पर जोर देते हुए यह दलील देते रहे हैं कि इससे संसाधनों की बर्बादी को रोका जा सकेगा और राज्यों व केंद्र के बीच आम लोगों के हितों के लिए साथ मिलकर काम करने की भावना बढ़ेगी, वहीं विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा व विधानसभा चुनाव साथ कराना न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि यह संघीय सिद्धांतों के भी खिलाफ है। विपक्ष ने इसकी व्यावहारिकता पर भी सवाल उठाए हैं।

