गदरपुर I एनएच पर ओवरटेक के दौरान बेकाबू टैंकर ने बाइक सवार पिता-पुत्र को रौंद दिया। हादसे में बाइक चला रहे पुत्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल पिता ने सीएचसी में दम तोड़ दिया। हादसे के बाद चालक टैंकर को मौके पर छोड़कर भाग गया। हादसे से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने टैंकर में तोड़फोड़ और इसे आग लगाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने समझाकर उन्हें शांत किया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए रुद्रपुर भिजवा दिया है।
ग्रामसभा नंदपुर के ग्राम मझरा नरसिंह निवासी सुखविंदर सिंह उर्फ डंपी (32) अपने पिता बलकार सिंह उर्फ बल्ली (65) के साथ शनिवार को बाइक से रुद्रपुर से गदरपुर लौट रहे थे। दोपहर करीब 12 बजे एनएच पर ग्राम सूरजपुर में तहसील भवन के पास बाजपुर से रुद्रपुर जा रहे टैंकर चालक ने एक वाहन को ओवरटेक करने का प्रयास किया।
ओवरटेक करने के प्रयास में चालक टैंकर से नियंत्रण खो बैठा
ओवरटेक करने के प्रयास में चालक टैंकर से नियंत्रण खो बैठा और उसने सामने से आ रही बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में बाइक चला रहे सुखविंदर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक पर पीछे बैठे उसके पिता बलकार सिंह गंभीर रूप घायल हो गए। हादसे में बाइक के परखचे उड़ गए। हादसे के बाद हाईवे पर दोनों तरफ जाम लग गया।
सूचना पर एसओ जसविंदर सिंह पुलिस फोर्स के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल बलकार सिंह को सीएचसी भिजवाया लेकिन अस्पताल पहुंचने पर उन्होंने भी दम तोड़ दिया। हादसे से आक्रोशित कुछ लोगों ने टैंकर में तोड़फोड़ करने और उसे फूंकने की कोशिश की। पुलिस ने बमुश्किल उन्हें समझाकर शांत कराया। सुखविंदर के परिवार में पत्नी कुलविंदर कौर, छह वर्षीय बेटा राजा, दो वर्षीय बेटी मनप्रीत मां कांता बाई हैं।
सूचना पर एसओ जसविंदर सिंह पुलिस फोर्स के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल बलकार सिंह को सीएचसी भिजवाया लेकिन अस्पताल पहुंचने पर उन्होंने भी दम तोड़ दिया। हादसे से आक्रोशित कुछ लोगों ने टैंकर में तोड़फोड़ करने और उसे फूंकने की कोशिश की। पुलिस ने बमुश्किल उन्हें समझाकर शांत कराया। सुखविंदर के परिवार में पत्नी कुलविंदर कौर, छह वर्षीय बेटा राजा, दो वर्षीय बेटी मनप्रीत मां कांता बाई हैं।
सुखविंदर के कंधों में थी परिवार की जिम्मेदारी
टैंकर की चपेट में आकर जान गंवाने वाला सुखविंदर दो भाइयों में छोटा था। खेतीबाड़ी से लेकर अन्य सभी कार्यों में उसकी ही भागीदारी रहती थी। बड़ा भाई पूरन सिंह भी हाथ बंटाता था लेकिन घर, परिवार एवं खेत खलिहान की देखरेख करने की जिम्मेदारी सुखविंदर पर ही थी। सुखविंदर के दोनों मासूम बच्चों को इस बात का जरा भी एहसास नहीं है कि उनके पिता और दादा अब कभी भी लौटकर नहीं आएंगे।
टैंकर से टकराकर हेलमेट भी हुआ चकनाचूर
टैंकर की चपेट में आए सुखविंदर ने हेलमेट भी पहना हुआ था लेकिन टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि सुखविंदर का सिर टैंकर से सामने से टकराया। इससे हेलमेट चकनाचूर होकर टूट गया। सीधी टक्कर लगने से सुखविंदर टैंकर के साथ घिसटता चला गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
टैंकर से टकराकर हेलमेट भी हुआ चकनाचूर
टैंकर की चपेट में आए सुखविंदर ने हेलमेट भी पहना हुआ था लेकिन टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि सुखविंदर का सिर टैंकर से सामने से टकराया। इससे हेलमेट चकनाचूर होकर टूट गया। सीधी टक्कर लगने से सुखविंदर टैंकर के साथ घिसटता चला गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

