देहरादून I कोरोना महामारी के चलते चालू लॉकडाउन में प्रदेश के लगभग 10 लाख किसानों पर मौसम भी कहर बरपा रहा है। पहाड़ से लेकर मैदान तक बारिश और ओलावृष्टि से कृषि व बागवानी फसलें तबाह हो रही हैं। फरवरी व मार्च महीने में हुई बारिश व ओलावृष्टि से भी इन फसलों को छह करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ था।
प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में गेहूं की कटाई का काम चल रहा है। जबकि पर्वतीय जिलों में सेब, नाशपाती, खुमानी, आड़ू फसल तुड़ाई की कगार पर खड़ी है। फरवरी व मार्च माह में हुई बारिश व ओलावृष्टि से किसानों की फसल बर्बाद होने से करीब 6 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था। इसके बाद से प्रदेश में लागू लॉकडाउन के कारण किसानों की आर्थिक हालत खासी खराब हो गई है।
अब फसल पककर तैयार है, तो फसलों की कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे थे। ऐसे में एक बार फिर से मौसम भी इन फसलों पर कहर बन कर टूट पड़ा है। दो दिन से हो बारिश से प्रदेश में कृषि व बागवानी की फसलों को खासा नुकसान हुआ है। सोमवार को कृषि निदेशक गौरी शंकर और अपर निदेशक उद्यान रतन कुमार ने सभी जिलों को पत्र जारी करके नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट मांगी है।
प्रदेश में ये है कृषि और बागवानी का क्षेत्रफल
प्रदेश में 3.27 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूूं की खेती होती है। जिसमें 9.51 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन होता है। जबकि बागवानी फसलों के तहत 25675 हेक्टेयर पर लगभग 60 हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है। जबकि 13193 हेक्टेयर पर नाशपाती, 8193 हेक्टेयर पर आड़ूू, 8065 हेक्टेयर पर खुमानी, 10610 हेक्टेयर पर लीची की पैदावार होती है।
बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर विभागों से रिपोर्ट मांगी गई है। नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार के मानकों के आधार पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
– सुबोध उनियाल, कृषि एवं उद्यान मंत्री

