राशन कार्ड धारकों के लिए शुरू होने वाली है नई सुविधा, 23 लाख कार्डधारकों को होगा फायदा

देहरादून I उत्तराखंड में जल्द ही मोबाइल फोन पोर्टबिलिटी की तरह ही राशन कार्ड पोर्टबिलिटी योजना की शुरूआत होने वाली है। इस सुविधा के शुरू होने के बाद गरीबों को प्रदेश की किसी भी सरकारी सस्ते राशन की दुकान से उसी कार्ड पर खाद्यान्न मिल सकेगा, जो पूर्व में बना हो। फिलहाल यह व्यवस्था देश के आंध्र प्रदेश, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश में लागू है। प्रदेश में योजना को लागू करने की कवायद तेज हो गई है। 

विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में पहाड़ों पर रहने वाले गरीब रोजगार की आस में प्रदेश के मैदानी जिले हरिद्वार, देहरादून, ऊधम सिंह नगर आदि में आ जाते हैं। यहां उन्हें सस्ती दरों पर राशन नहीं मिल पाता है। क्योंकि उनके राशन कार्ड तो मूल निवास से बने हैं। इस राशन कार्ड को स्थानांतरित कराने के लिए बड़ी लंबी प्रक्रिया होने के कारण गरीब राशन कार्ड स्थानांतरण नहीं करा पाते है।

महंगी दरों पर खाद्यान्न लेकर गुजर बसर करनी पड़ती है

ऐसे में मजबूरन पेट भरने के लिए महंगी दरों पर खाद्यान्न लेकर गुजर बसर करनी पड़ती है। सरकार ने गरीबों की इस समस्या को देखते हुए उसके निस्तारण की पहल शुरू करने की तैयारी की है। इसके तहत प्रदेश में मोबाइल सिम पोर्टबिलिटी की तरह ही राशन कार्ड पोर्टबिलिटी योजना शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

इसके शुरू होने के बाद प्रदेश के किसी भी जिले से बना राशन कार्ड दूसरे जिले में मान्य होगा। बस कार्डधारक को स्थानीय स्तर पर कार्ड का ब्योरा आपूर्ति कार्यालय में देकर उसे अपने घर के पास वाली दुकान से कार्ड को जुड़वाना होगा। इसके लिए उसे नया कार्ड बनवाने की आवश्यकता भी नहीं होगी।  

अब सस्ते राशन से वंचित नहीं रहना पड़ेगा

उदाहरण के तौर पर पौड़ी या अन्य किसी अन्य जनपद से कोई परिवार देहरादून आकर रहता है तो उसे सस्ते राशन से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत कार्डधारक को देहरादून में उसके निवास के पास स्थित दुकान से जोड़ दिया जाएगा। जहां से उसे आसानी से खाद्यान्न मिल सकेगा। 

सस्ती दर पर राशन वितरण के लिए पोर्टबिलिटी राशन कार्ड योजना पर विचार किया जा रहा है। आंध्र प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में यह योजना सफल रही है। इन राज्यों में योजना को किस तरह से लागू किया गया। इसका अध्ययन कर रहे हैं।
– सुशील कुमार, सचिव, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग

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