लखनऊ: पटना साहिब में अपना चुनाव प्रचार खत्म करने के बाद मीडिया से बात करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि हिंदी भाषी राज्यों में भाजपा का सफाया जा रहा है। शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके खिलाफ भाजपा ने केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को मैदान में उतारा है। बिहारी बाबू ने कहा कि खासकर के बिहार और उत्तर प्रदेश में भाजपा का सूपड़ा साफ होने जा रहा है। भाजपा सरकार ने गलत तरीके से जीएसटी लागू किया, नोटबंदी करके देश की जनता को परेशानी में डाल दिया, जिससे कई लोगों की जान चली गई।
सिन्हा ने कहा कि भाजपा अब ‘वन-मैन शो और टू-मैन आर्मी’ बन गयी है। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जबरन रिटायर होने के लिए मजबूर किया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय ने दावा कि भाजपा को उत्तर प्रदेश में बड़ा झटका लगेगा। इसके साथ झारखंड और बिहार में भी वो हारने जा रही है। ग्रैंड अलायंस (जीए) को लगभग 400 सीटें मिलेंगी और एनडीए 100 सीटों तक सीमित हो जाएगा। मोदी सरकार
ने किसानों, छात्रों और कमजोर वर्ग के लोगों को निराश किया है।
इसके साथ, अंतिम चरण के मतदान के पूर्व शनिवार को बसपा सुप्रीमो ने एक ट्वीट के जरिए आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, क्या लोकसभा 2019 के चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वाराणसी से हारना 2014 में उनकी जीत से अधिक ऐतिहासिक होगा? ‘अगर योगी को गोरखपुर में हराया जा सकता है, तो वाराणसी में पीएम मोदी को क्यों नहीं? क्या वाराणसी 1977 की रायबरेली वाली स्थिति को दोहराएगा?
शत्रुघ्न सिन्हा तो भाजपा से बगावत करके कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, तो उनके पेट में जो दर्द हो रहा है, वो लाजिमी है। बिहार में गठबंधन एनडीए को टक्कर जरूर दे रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों का सूपड़ा साफ होने जा रहा है। बिहार में कई सीटों पर कांटे की टक्कर देखी जा सकती है। जानकारों का मानना है कि बिहार में लड़ाई किसी के पक्ष में एकतरफा नहीं है और यह लड़ाई 50-50 फिर 60-40 में निपट सकती है।
वहीं, उत्तर प्रदेश में भाजपा को नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने शिखर पर थी। यहां पर ज्यादा सीटों का नुकसान हो सकता है। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा और रालोद के एक साथ आ जाने से गठबंधन पश्चिमी, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश हर जगह पर भाजपा को कड़ी टक्कर देता
नजर आ रहा है। मायावती, अखिलेश औऱ अजित सिंह के एक साथ आ जाने से चुनावी समीकरण बिल्कुल बदल गए हैं।
पिछले चुनाव में जनता में कांग्रेस के प्रति आक्रोश था और एक मजबूत विकल्प मिलने पर लगभग हर जाति और वर्ग का वोट भारतीय जनता पार्टी को मिला था, लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। तमाम विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि कि भाजपा ने चुनाव पूर्व जो वादे किए थे उसमें से कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया और जनता को कई अन्य परेशानियों में डाल दिया गया।
इसके साथ सपा-बसपा और रालोद के साथ आ जाने से मतदाताओं को यह समझ में आ गया कि अगर हम गठबंधन को वोट करेंगे, तो हमारा वोट बेकार नहीं जाएगा। इससे हमारे नेताओं को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में भाजपा की सहयोगी रहे ओम प्रकाश राजभर ने भाजपा का साथ छोड़ दिया और भाजपा के हार और गठबंधन के पक्ष में कसीदे पड़ते हुए देखे गए। इससे यह साफ हो रहा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

