नई दिल्ली : पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने ईवीएम को लेकर अब बड़ा बयान दिया है जिससे विपक्षी दलों को झटका लग सकता है। ओपी रावत ने कहा है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता है। ईवीएम का सुरक्षा प्रोटोकॉल बेहद मजबूत है। अगर कोई स्ट्रांगरुम को खोलना चाहता है तो उस वक्त सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों को वहां मौजूद रहना आवश्यक है। मशीनें उनकी उपस्थिति में ही बाहर निकाली जाती हैं। मॉक पोल का भी संचालन किया जा सकता है।
पूर्व चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने आगे कहा कि इतना ही नहीं ईवीएम को जब मतदान के लिए तैयार किया जाता है तो उस समय भी पोलिंग बूथों पर दोबारा से मॉक पोल कंडक्ट किया जाता है। मॉक पोल के तहत वहां मौजूद पोलिंग एजेंट से अभ्यास के तौर पर पहले वोट करने को कहा जाता है इसके बाद वोटों की गिनती की जाती है। इन सभी प्रयासों के तहत ये सुनिश्चित किया जाता है कि ईवीएम सुरक्षित है और इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है।
बता दें कि ईवीएम पर रार थमने का नाम नहीं ले रहा है। सत्ता पक्ष यानि एनडीए को छोड़कर ज्यादातर राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग की मंशा पर शक है तो ईवीएम उनकी नजरों में खलनायक है। ये बात अलग है कि विपक्षी दल उस वक्त कोई सवाल नहीं उठाते हैं जब ईवीएम से जनादेश उनके पक्ष में जाता है।
आम चुनाव 2019 के छठवें चरण से पहले ईवीएम की मंशा पर विपक्षी दलों को किसी तरह का ऐतराज नहीं था। लेकिन छठवें चरण के मतदान से ईवीएम पर हल्ला मचना शुरू हुआ और सातवें चरण आते आते विपक्षी दल आश्वस्त हो गए कि मौजूदा सरकार ईवीएम के जरिए दोबारा सत्ता में आने की कोशिश कर रही है।

