निर्मला के बजट में उत्तराखंड के हाथ खाली, अब 15वें वित्त आयोग से उम्मीद

देहरादून I केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट में ग्रीन बोनस मिलने का सपना टूट गया है। बजट पेश होने से पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत नीति आयोग के समक्ष ग्रीन बोनस की जोरदार पैरोकारी कर आए थे।

नीति आयोग ने भी पर्यावरणीय सेवाओं के एवज में हिमालयी राज्यों को वित्तीय अनुदान दिए जाने पर अपनी सहमति जताई थी। लेकिन शुक्रवार को पेश हुए बजट में ग्रीन बोनस का जिक्र तक नहीं हुआ। 

इतना ही नहीं भौगोलिक कठिनाइयों और पर्यावरणीय दबावों के बीच विकास की चुनौती का सामना कर रहे उत्तराखंड को निराशा हुई कि 2021 में प्रस्तावित हरिद्वार महाकुंभ और राष्ट्रीय खेलों के लिए बजट में प्रावधान नहीं हुआ। 

लेकिन प्रदेश को अधिक झटका ग्रीन बोनस न मिलने से लगा। पिछले करीब एक दशक से प्रदेश में काबिज रही सरकारों ने इस मांग को केंद्र से बेहद गंभीरता के साथ उठाया। हिमालयी राज्यों को ग्रीन बोनस देने की पैरोकारी करने वालों में केंद्र में कैबिनेट मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक भी शामिल रहे हैं।

राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी भी ग्रीन बोनस की लगातार वकालत कर रहे हैं। मगर पर्यावरणीय संरक्षण के दबाव में विकास की भारी कीमत चुका रहे उत्तराखंड पर फिलहाल केंद्र की कृपा दृष्टि नहीं पड़ी।

ऐसे में अब उत्तराखंड की उम्मीदें नीति आयोग और 15वें वित्त आयोग पर टिक गई हैं। ये दोनों आयोग हिमालयी राज्यों को पर्यावरणीय सेवाओं के एवज में केंद्रीय सहायता दिए जाने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं।

अभी वित्त आयोग और नीति आयोग की रिपोर्ट आने वाली है। नीति आयोग हमारी मांग से सहमत है। हमने सभी विषयों पर काफी गंभीरता से चिंता हुई है। इन पर केंद्र सरकार बहुत गंभीरता से विचार कर रहा है।
-त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री

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