हल्द्वानी I 55 वर्षीय खीम सिंह यूं तो छात्र जीवन से ही माओवादी गतिविधियों से जुड़ गया था पर फरवरी 2016 में वह चर्चा में आया जब एसडीएम नैनीताल की सरकारी गाड़ी को फूंकने की कोशिश की थी। सोमेश्वर की विधायक के घर के बाहर पटाखे छोड़कर दहशत फैलाई।
इससे पहले 2012 और 16 में उत्तराखंड विधानसभा व लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करते हुए पंफलेट चिपकाए थे। उसके खिलाफ रुद्रपुर, नैनीताल, अल्मोड़ा के थानों में कई केस दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी पर उत्तराखंड सरकार ने पचास हजार का इनाम घोषित कर रखा था।
एटीएस ने बरेली जंक्शन से पकड़ा
यूपी एटीएस की संयुक्त टीम ने प्रतिबंधित माओवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) के उत्तराखंड जोनल कमेटी सचिव खीम सिंह बोरा को बरेली जंक्शन से गिरफ्तार कर लिया। उसे सीधे लखनऊ ले जाया गया जहां डीजीपी ओपी सिंह ने उसकी गिरफ्तारी का खुलासा किया। वह उत्तराखंड के अल्मोड़ा का निवासी है और संगठन के सम्मेलन में शामिल होने ट्रेन से धनबाद जाने की फिराक में था।
बरेली एटीएस इकाई के प्रभारी इंस्पेक्टर मंजीत सिंह ने अपनी टीम व लखनऊ एटीएस के साथ बुधवार दोपहर 12 बजे जंक्शन के बाहर से खीम सिंह बोरा उर्फ कृष्णा उर्फ प्रकाश उर्फ राजन उर्फ प्रभाकर उर्फ विजय प्रहरू को हिरासत में ले लिया। अल्मोड़ा के सोमेश्वर अंतर्गत हत्यूड़ा गांव निवासी खीम सिंह से एक अवैध पिस्टल, पेन ड्राइव, जंगल के कुछ नक्शे, साहित्य, छोटा चाकू, कटर, पंखा, लाइटर व छाता बरामद किया गया। टीम सीधे उसे लखनऊ ले गई जहां उसकी गिरफ्तारी दर्शाकर एटीएस थाने की सुपुर्दगी में दे दिया गया।
बरेली एटीएस इकाई के प्रभारी इंस्पेक्टर मंजीत सिंह ने अपनी टीम व लखनऊ एटीएस के साथ बुधवार दोपहर 12 बजे जंक्शन के बाहर से खीम सिंह बोरा उर्फ कृष्णा उर्फ प्रकाश उर्फ राजन उर्फ प्रभाकर उर्फ विजय प्रहरू को हिरासत में ले लिया। अल्मोड़ा के सोमेश्वर अंतर्गत हत्यूड़ा गांव निवासी खीम सिंह से एक अवैध पिस्टल, पेन ड्राइव, जंगल के कुछ नक्शे, साहित्य, छोटा चाकू, कटर, पंखा, लाइटर व छाता बरामद किया गया। टीम सीधे उसे लखनऊ ले गई जहां उसकी गिरफ्तारी दर्शाकर एटीएस थाने की सुपुर्दगी में दे दिया गया।
मनीष की निशानदेही पर पकड़ा गया खीम सिंह
एटीएस ने भोपाल से मनीष श्रीवास्तव और उसकी पत्नी को फर्जी पहचानपत्र के आरोप में पकड़ा था। दोनों जौनपुर जिले के मछलीशहर क्षेत्र के रहने वाले हैं। पति और पत्नी पर नक्सली गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। पता चला कि मनीष की निशानदेही पर इनामी माओवादी खीम सिंह बोरा को एटीएस ने पकड़ा है।
ईस्टर्न रीजनल ग्रुप का सचिव है खीम सिंह
गिरफ्तारी इनामी माओवादी खीम सिंह बोरा का साथी देवेंद्र चम्याल जेल में बंद है। देवेंद्र ने नैनीताल पुलिस को बताया था कि खीम सिंह माओवादियों की ईस्टर्न रीजनल ग्रुप का सदस्य है। उत्तराखंड में माओवादी गतिविधियां खीम सिंह ही चलाता था।
ईस्टर्न रीजनल ग्रुप का सचिव है खीम सिंह
गिरफ्तारी इनामी माओवादी खीम सिंह बोरा का साथी देवेंद्र चम्याल जेल में बंद है। देवेंद्र ने नैनीताल पुलिस को बताया था कि खीम सिंह माओवादियों की ईस्टर्न रीजनल ग्रुप का सदस्य है। उत्तराखंड में माओवादी गतिविधियां खीम सिंह ही चलाता था।
पुलिस का अगला टारगेट भास्कर पांडे
उत्तराखंड में प्रशांत राही की गिरफ्तारी से ही माओवादी आंदोलन का मिशन ठहर गया। खीम सिंह बोरा ने कुछ लोगों को जोड़कर संगठन चलाने की कोशिश की, लेकिन पहाड़ पर संगठन का ठोस आधार नहीं होने के कारण सदस्य बिखर गए।
देवेंद्र चम्याल और भगवती को पुलिस ने 24 सितंबर 17 को गिरफ्तार कर लिया था। अब उत्तराखंड पुलिस का अगला टारगेट फरार पांच हजार रुपये का इनामी और अल्मोड़ा निवासी भास्कर पांडे है।
देवेंद्र चम्याल और भगवती को पुलिस ने 24 सितंबर 17 को गिरफ्तार कर लिया था। अब उत्तराखंड पुलिस का अगला टारगेट फरार पांच हजार रुपये का इनामी और अल्मोड़ा निवासी भास्कर पांडे है।
उत्तराखंड में संगठन कमजोर हुआ तो भागा
खीम सिंह उत्तराखंड में संगठन का सर्वोच्च पद संभाल रहा था। उसने उत्तराखंड में माओवादियों की भर्ती के लिए कई अभियान चलाए पर हाल फिलहाल वहां पर संगठन काफी कमजोर हो गया था। इसके बाद खीम सिंह उत्तराखंड से भागकर झारखंड के सम्मेलन में भाग लेने जा रहा था। वह संगठन की केंद्रीय कार्यसमिति में शामिल होने में प्रयासरत था।
14 साल से परिवार से अलग है आरोपी
खीम सिंह 2005 से अपने परिवार से अलग है। हालांकि साल दो साल में उसके परिवार से मिलने की सूचना पर पुलिस और एजेंसियां दबिश देती रही हैं पर वो मिला नहीं। वह न तो मोबाइल रखता है और न ही एक जगह ज्यादा दिन रुकता है। बस या टेंपो से सफर करता है और रास्ते में किसी को अपना परिचय नहीं देता। इसीलिए उसकी गिरफ्तारी काफी चुनौती का काम था। लखनऊ एटीएस ने पहले नक्सली गतिविधियों से जुड़े मनीष श्रीवास्तव नाम के व्यक्ति को पकड़ा था। उससे पूछताछ के बाद ही खीम सिंह की तलाश शुरू की गई।
14 साल से परिवार से अलग है आरोपी
खीम सिंह 2005 से अपने परिवार से अलग है। हालांकि साल दो साल में उसके परिवार से मिलने की सूचना पर पुलिस और एजेंसियां दबिश देती रही हैं पर वो मिला नहीं। वह न तो मोबाइल रखता है और न ही एक जगह ज्यादा दिन रुकता है। बस या टेंपो से सफर करता है और रास्ते में किसी को अपना परिचय नहीं देता। इसीलिए उसकी गिरफ्तारी काफी चुनौती का काम था। लखनऊ एटीएस ने पहले नक्सली गतिविधियों से जुड़े मनीष श्रीवास्तव नाम के व्यक्ति को पकड़ा था। उससे पूछताछ के बाद ही खीम सिंह की तलाश शुरू की गई।

