देहरादून. 22 मई यानी शुक्रवार को उत्तराखंड में लॉकडाउन के 2 महीने पूरे हो जाएंगे. इन 2 महीने में लॉकडाउन के दौरान उत्तराखंड में सबसे ज़्यादा नुकसान पर्यटन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को हुआ है क्योंकि जिस समय ये लॉकडाउन हुआ प्रदेश में वही समय टूरिज़्म का था. पर्यटन और ट्रांस्पोर्ट दोनों सेक्टर से उत्तराखंड में लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी जुड़ी है. ऐसे में नुकसान को देखते हुए उत्तराखंड कैबिनेट ने गुरुवार को दोनों सेक्टर में बड़ी राहत देते हुए कई फ़ैसले किए. उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने कैबिनेट के फ़ैसलों की जानकारी दी.
कैबिनेट के फ़ैसले
पब्लिक ट्रांस्पोर्ट की गाड़ियों का परमिट एक साल के लिए आगे बढ़ा दिया गया है यानी कमर्शियल गाड़ियों को एक साल परमिट रिन्यू नहीं करवाना होगा. इससे होने वाले 14 करोड़ 23 लाख रुपये का नुकसान सरकार उठाएगी.
कमर्शियल गाड़ियों को रोड टैक्स जमा करना होता है. लॉकडाउन से पैदा हालात को देखते हुए सरकार ने रोड टैक्स में भी 3 महीने की छूट दे दी है. इससे सरकार को 63 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. यह खर्च भी सरकार उठाएगी.
वहीं ट्रांसपोर्ट सेक्टर के साथ पर्यटन सेक्टर में भी सरकार ने राहत देने की कोशिश की है. सरटकार ने होटल, रिज़ॉर्ट, रेस्टोरेंट मालिकों के कमर्शियल पानी के बिल में छूट दी है. पहले हर साल इसमें 15 परसेंट की बढ़ोतरी होती थी लेकिन इस साल सिर्फ़ 9 परसेंट की बढ़ोतरी होगी. इससे होने वाला एक करोड़ 87 लाख रुपये का घाटा सरकार भरेगी.
पर्यटन विभाग से अलग-अलग स्कीम में करीब ढाई लाख लोग जुड़े हैं. मसलन किसी का ई-रिक्शा है, कोई ऑटो वाला है. ऐसे ढाई लाख लोगों के अकाउंट में सरकार एक-एक हज़ार रुपये डालेगी. इस पर आने वाला 25 करोड़ रुपये का खर्च सरकार उठाएगी.
जिन लोगों ने पर्यटन के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्कीम और दीन दयाल होम स्टे स्कीम में लोन लिया है उनके 3 महीने, अप्रैल से जून, की किस्त का ब्याज सरकार भरेगी. इनसे पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड की तरफ से भी कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी.
होटल और रेस्टोरेंट में बार मालिकों को फीस में 3 महीने की छूट दी गयी है जबकि बार के रजिस्ट्रेशन और रिन्युअल फीस में एक साल की छूट दी गई है.
इसके अलावा लॉक डाउन से मार्च के आखिरी 10 दिन के 34 करोड़ और 1 अप्रैल से 3 मई तक 195 करोड़ के नुकसान का खर्च सरकार उठाएगी.

