देहरादूनः आईसीयू की कमी से उखड़ रही मरीजों की सांस, जानिए स्वास्थ्य सेवाओं का सच

देहरादून में आईसीयू की कमी के कारण मरीजों की सांसें उखड़ने की घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल रही हैं। आए दिन बड़ी संख्या में मरीजों को लेकर उनके तीमारदार एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकते रहते हैं। रात के समय दुर्घटना के घायलों और गंभीर स्थिति के मरीजों की अधिक संख्या में पहुंचने के कारण यह दिक्कत और बढ़ जाती है। ऐसे समय में जब मरीज की सांसें उखड़ रही होती हैं और उसे बचाने के लिए तत्काल बेहतर से बेहतर इलाज की आवश्यकता होती है, उस समय आईसीयू की खोज में अस्पतालों की खाक छानने से किसी मरीज के बचने की संभावना बहुत कम रह जाती है।
केस एक: 
जंगली मशरूम खाने से बीमार हुए टिहरी गढ़वाल के थौलधार ब्लॉक के गांव गैर नगुण निवासी चार वर्षीय बच्चे की हालत ज्यादा बिगड़ने पर 31 जुलाई को वहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से डॉक्टरों ने उसे राजकीय दून मेडिकल कॉलेज रेफर किया। परिजन बच्चे को लेकर देर रात दून अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को देखते हुए आईसीयू वार्ड में शिफ्ट करने की सलाह दी। पता चला कि आईसीयू के पांचों बेड फुल हैं। मजबूरन बाद बच्चे को निजी अस्पताल ले जाया गया। जहां उसकी मौत हो गई।

केस दो: 
करीब एक महीने पहले बंजारावाला निवासी एक व्यक्ति अपनी सास को उपचार के लिए दून अस्पताल लेकर पहुंचे गए। हालत बिगड़ी तो मरीज को अटल आयुष्मान योजना की सुविधा वाले पटेलनगर स्थित के एक निजी अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन वहां भी आईसीयू खाली न मिलने के कारण परिजन उन्हें लेकर रिस्पना पुल स्थित एक अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई।

राजधानी के सरकारी अस्पताल में महज पांच बेड का आईसीयू
प्रदेश के सबसे बडे़े सरकारी अस्पताल में शामिल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक में आईसीयू कक्ष में बेड की संख्या ऊंट के मुंह में जीरा वाली स्थिति में है। दून अस्पताल के आईसीयू कक्ष में महज पांच बेड हैं। लेकिन यह अक्सर फुल रहते हैं। दून अस्पताल में देहरादून जिलेके अलावा पूरे प्रदेश से और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समीपवर्ती जिलों के गंभीर मरीज भी उपचार के लिए लाए जाते हैं। जिससे आईसीयू की जरूरत वाले गंभीर मरीज को राहत मिलने की उम्मीद कम रहती है।

आयुष्मान योजना का भी नहीं मिल रहा फायदा
दून अस्पताल के बाद मरीजों को आईसीयू न मिलने पर उन निजी अस्पतालों में रेफर किया जाता है, जो आयुष्मान योजना के तहत कवर होते हैं। तीमारदार गंभीर हालत में एंबुलेंस से मरीज को इन निजी अस्पतालों में ले जाता है, लेकिन कई मौकों पर सीमित संख्या में योजना के अंतर्गत कवर हो रहे इन अस्पतालों में भी आईसीयू नहीं मिल पाता। जिससे तीमारदार मरीज का इलाज दूसरे अस्पताल ले जाकर महंगे खर्च पर कराने को मजबूर होते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ेंगे आईसीयू बेड
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या की तुलना में आईसीयू में बेड निश्चिततौर पर बहुत कम हैं। उन्होंने बताया कि राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नए आईसीयू में 21 बेड बढ़ेंगे। इसका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। जिससे वहां 26 बेड हो जाएंगे। इसी तरह, गांधी शताब्दी अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल में भी क्रमश: चार और तीन बेड का आईसीयू बनने जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *