अनुच्छेद 370 अंतरराष्ट्रीय मसला नहीं बल्कि भारत का आंतरिक मामला, UNSC में भारत ने रखा अपना पक्ष

नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने जम्मू कश्मीर के मसले पर यूएनएससी में हो रहे अंतरराष्ट्रीय बैठक पर भारत का पक्ष रखा। जानकारी के अनुसार, बैठक में  यूएनएससी के 5 स्थाई और 10 अस्थाई देशों के प्रतिनिधियों को ही शामिल होने को कहा गया था। बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए अकबरुद्दीन ने कश्मीर पर पाकिस्तान के दावे का भरपूर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिहाद की बात कर भारत में हिंसा फैला रहा है पाकिस्तान। 
चीन ने जम्मू- कश्मीर मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक बुलाने की मांग की थी। चीन ने ये भी मांग किया था कि बैठक में मंत्रणा क्लोज्ड- डोर कंसल्टेशन यानी बंद कमरे में होनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य नहीं होने के कारण पाकिस्तान को इस बैठक में शामिल नहीं किया गया था।
प्रेसीडेंट ट्रंप और इमरान खान की हुई थी बातचीत
शुक्रवार को अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से कश्मीर के मुद्दे को लेकर टेलीफोनिक वार्ता की थी। पिछले महीने ही पीएम इमरान खान के वाशिंगटन दौरे को लेकर भी ये वार्ता हुई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने यहां पर भी भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर के क्षेत्रीय मुद्दे को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाने की बात को महत्व दिया। इसके अलावा इन दोनों के बीच इश पर भी बातचीत हुई कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच के रिश्ते किस तरह से सुधारे जा सकते हैं। ट्रंप ने यहां भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत पर जोर दिया।

-अकबरुद्दीन ने आगे कहा कि अनुच्छेद 370 भारत का आंतरिक मामला है, यह कोई अंतरराष्ट्रीय मामला नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि हम धीरे-धीरे जम्मू कश्मीर से पाबंदिया हटा लेंगे। इस फैसले से बाहरी लोगों को कोई मतलब नहीं। अकबरुद्दीन ने आगे कहा कि जम्मू कश्मीर को लेकर भारत सरकार ने जो भी फैसला किया है वह वहां के विकास के लिए किया गया है। 
-यूएनएससी में भारत का पक्ष रख रखते हुए सैय्यद अकबर अकबरुद्दीन ने ये बातें कही। उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर का इतिहास दुनिया जानती है। हिंसा किसी भी मसले का हल नहीं है। 
-उन्होंने आगे कहा कि हम जानते हैं कि हमें अपने लोगों का खयाल कैसे रखना है। हम लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं। हमारा स्टैंड शुरू से क्लियर है, पहले भी यही था और आज भी हम अपने पक्ष तटस्थ हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है।

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