नई दिल्ली : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार को भारत दौरे पर पहुंच रहे हैं, जिस दौरान उनकी तमिलनाडु के तटीय शहर महाबलिपुरम (ममल्लापुरम) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक वार्ता होगी। 24 घंटे की इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच रक्षा, कारोबार और सीमा विवाद पर भी चर्चा होने की संभावना है, पर आखिर इस वार्ता से भारत को क्या हासिल होगा? क्या दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता भी होगा? क्या दोनों नेताओं के बीच कश्मीर पर भी बात होगी, जिसे लेकर चीन की तरफ से अक्सर ‘करीबी नजर’ बनाए रखने जैसी बातें सामने आती रही हैं, जबकि भारत स्पष्ट कर चुका है कि यह उसका आंतरिक मामला है और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष को दखल देने की जरूरत नहीं है।
चीन के शहर वुहान में 27-28 अप्रैल 2018 को हुई शी और पीएम मोदी की पहली अनौपचारिक वार्ता के बाद होने जा रही यह दूसरी अनौपचारिक बैठक कई मायनों में खास है। शी का भारत दौरा ऐसे समय में होने जा रहा है, जबकि पाकिस्तान के साथ उसके रिश्ते तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं और इमरान खान ने अभी-अभी चीन का दौरा किया है। चीन पहले भी कश्मीर मुद्दे को लेकर अपनी चिंता जता चुका है तो इमरान खान के दौरे के दौरान भी कहा कि वह हालात पर करीब से नजर बनाए हुए है। इन सबके बीच भारत ने फिर से साफ किया है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और किसी भी दूसरे देश को इसमें दखल देने या इस पर किसी तरह की टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। इस संबंध में चीन के उस बयान पर भी गौर करने की जरूरत है, जिसमें उसने कहा कि पीएम मोदी और शी की दूसरी अनौपचारिक बातचीत में कश्मीर संभवत: कोई बड़ा मुद्दा न हो।

