महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस राज्य में मुख्य मुकाबला भाजपा-शिवसेना और कांग्रेस-राकांपा गठबंधन के बीच है। भाजपा को उम्मीद है कि वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के नेतृत्व में एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगी जबकि कांग्रेस को लगता है कि स्ता विरोधी लहर से उसे फायदा पहुंच सकता है। कुल मिलाकर चुनाव जीतने की अनुकूल स्थितियां भाजपा-शिवसेना गठबंधन के पक्ष में हैं। इस राज्य में विपक्ष की कमजोरी का सीधा लाभ भाजपा-शिवसेना गठबंधन को मिलता दिख रहा है।
समझा जा रहा है कि महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन आसानी से सरकार बना लेगा। यह गठबंधन अपने छोटे सहयोगी दलों के साथ राज्य में 220 से 240 सीटें जीत सकता है। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। गत विधानसभा चुनाव में भाजपा को 27.81 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने 122 सीटें जीतीं जबकि 19.35 प्रतिशत वोटों के साथ शिवसेना 63 सीटों पर विजयी हुई। कांग्रेस को 42 सीटें (17.95% वोट), राकांपा को 41 सीटें (17.24% वोट) मिलीं। भाजपा और शिवसेना के वोट प्रतिशत को यदि जोड़ दिया जाए तो यह गठबंधन आसानी से बहुमत के आंकड़े को पार कर जाएगा।

