ऊधमसिंह नगर I उत्तराखंड के नानकमत्ता में आईटीबीपी में भर्ती होने गए सूरज सक्सेना की हत्या से हताश होकर उसके भाई गोविंद ने भी मौत को गले लगा लिया। गुरुवार देर रात अपने ही घर मे फांसी लगाकर गोविंद ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
बताया जा रहा है कि गोविंद भाई सूरज की मौत के बाद से काफी सदमे में था। हत्यारों पर कोई ठोस कार्यवाई और अन्य लोगों की गिरफ्तारी नहीं होने से भी परेशान था। गोविंद ने आईटीबीपी जवानों पर भाई की हत्या का आरोप लगाया था।
जिसके बाद तीन जवानों को 27 अगस्त को गिरफ्तार भी किया गया था। लेकिन उसके बाद किसी भी आरोपी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गोविंद की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
शव में पड़ गए थे कीड़े
बता दें कि,18 अगस्त को आईटीबीपी में भर्ती होने के लिए हल्दूचौड़ गए नानकमत्ता के छात्र का शव संदिग्ध हालात में आईटीबीपी परिसर की झाड़ियों में मिला था। शव में कीड़े पड़ गए थे।
परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए नानकमत्ता थाने और हल्दूचौड़ में घंटों हंगामा किया। इसके बाद मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की। वार्ड नंबर सात अनाज मंडी नानकमत्ता निवासी ओमप्रकाश सक्सेना का बेटा सूरज सक्सेना (24) श्री गुरुनानक देव पीजी कॉलेज नानकमत्ता में एमए प्रथम वर्ष का छात्र था।
सूरज 15 अगस्त की शाम को घर से 34वीं वाहिनी भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल कैंप हल्दूचौड़ में भर्ती होने के लिए अपने साथियों के साथ गया था। बताया जा रहा है कि 16 अगस्त को सूरज दौड़ में वह सफल हो गया था।
दौड़ के बाद टोकन जमा करने को लेकर उसका आईटीबीपी भर्ती के कुछ अधिकारियों के साथ विवाद हो गया था। विवाद के बाद से ही वह अचानक लापता हो गया। बाद में उसका शव आईटीबीपी परिसर में ही झाड़ियों में पड़ा मिला था।
परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए नानकमत्ता थाने और हल्दूचौड़ में घंटों हंगामा किया। इसके बाद मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की। वार्ड नंबर सात अनाज मंडी नानकमत्ता निवासी ओमप्रकाश सक्सेना का बेटा सूरज सक्सेना (24) श्री गुरुनानक देव पीजी कॉलेज नानकमत्ता में एमए प्रथम वर्ष का छात्र था।
सूरज 15 अगस्त की शाम को घर से 34वीं वाहिनी भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल कैंप हल्दूचौड़ में भर्ती होने के लिए अपने साथियों के साथ गया था। बताया जा रहा है कि 16 अगस्त को सूरज दौड़ में वह सफल हो गया था।
दौड़ के बाद टोकन जमा करने को लेकर उसका आईटीबीपी भर्ती के कुछ अधिकारियों के साथ विवाद हो गया था। विवाद के बाद से ही वह अचानक लापता हो गया। बाद में उसका शव आईटीबीपी परिसर में ही झाड़ियों में पड़ा मिला था।
दोनों जवान बेटों की मौत से सक्सेना परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
नगर में ठेला लगाकर बच्चों को शिक्षा दिलाने वाले पिता पर दो बेटों की मौत के बाद दुखों का पहाड़ टूट गया है। बेटों के लिए संजोए सुनहरे सपने टूट गए, वहीं बहन की रक्षा का संकल्प लेने वाले दोनों भाई भी दुनिया से चले गए। छोटे बेटे की हत्या के बाद टूट चुके पिता ने जैसे तैसे खुद को संभाला तो अब बड़े बेटे ने मौत को गले लगाकर गहरा सदमा दे दिया।
ओमप्रकाश सक्सेना के दो बेटों के साथ एक बेटी सपना सक्सेना है। ओमप्रकाश और उनकी पत्नी वैशाखा ने तीनों बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए रात-दिन मेहनत की। ओमप्रकाश ठेला लगाते तो वैशाखा भी सब्जी बेचकर परिवार का भरण पोषण करती। गोविंद सक्सेना के सबसे बड़ा होने पर उसने मोबाइल मैकेनिक का काम सीख लिया, लेकिन सूरज और सपना ने पढ़ाई जारी रखी।
ग्रेजुएशन करने के बाद पिता ने सूरज को देश की रक्षा के लिए सेना में भर्ती होने को कहा। सूरज सेना में तो नहीं जा सका, लेकिन आईटीबीपी में उसे मौका मिल गया। 16 अगस्त को भर्ती के लिए लालकुआं जा पहुंचा लेकिन ओमप्रकाश को क्या मालूम था कि भर्ती का गया सूरज अब उनके जीवन में रोशन नहीं होगा। आईटीबीपी लालकुआं में सूरज की मौत से परिवार भी टूट गया।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने परिवार की आर्थिक मदद की तो ओमप्रकाश ने बेटी सपना को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी, लेकिन 70 दिन बाद भी सपना को नौकरी नहीं मिली। जैसे तैसे ओमप्रकाश ने खुद को संभाला और परिवार को पालने के लिए फिर संघर्ष शुरू कर दिया।
कुछ दिन पहले ही उन्होंने मूंगफली का ठेला लगाया। ओमप्रकाश का परिवार अभी सूरज की मौत को भुला भी नहीं पाया था कि बृहस्पतिवार की रात बड़े बेटे गोविंद की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया। मां वैशाखा और बहन सपना के करुण क्रंदन से लोगों की आंखें भर आईं।
ओमप्रकाश सक्सेना के दो बेटों के साथ एक बेटी सपना सक्सेना है। ओमप्रकाश और उनकी पत्नी वैशाखा ने तीनों बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए रात-दिन मेहनत की। ओमप्रकाश ठेला लगाते तो वैशाखा भी सब्जी बेचकर परिवार का भरण पोषण करती। गोविंद सक्सेना के सबसे बड़ा होने पर उसने मोबाइल मैकेनिक का काम सीख लिया, लेकिन सूरज और सपना ने पढ़ाई जारी रखी।
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने परिवार की आर्थिक मदद की तो ओमप्रकाश ने बेटी सपना को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी, लेकिन 70 दिन बाद भी सपना को नौकरी नहीं मिली। जैसे तैसे ओमप्रकाश ने खुद को संभाला और परिवार को पालने के लिए फिर संघर्ष शुरू कर दिया।
कुछ दिन पहले ही उन्होंने मूंगफली का ठेला लगाया। ओमप्रकाश का परिवार अभी सूरज की मौत को भुला भी नहीं पाया था कि बृहस्पतिवार की रात बड़े बेटे गोविंद की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया। मां वैशाखा और बहन सपना के करुण क्रंदन से लोगों की आंखें भर आईं।

