नई दिल्ली। महाराष्ट्र में नतीजों के आने के बाद भी तस्वीर साफ नहीं है कि अगली सरकार कब सत्ता संभालेगी। 50-50 फॉर्मूले पर किसी तरह की सहमति न बन पाने के बीच शिवसेना की तरफ से बयानबाजी जारी है। गुरुवार को शिवसेना और एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार के बीच बातचीत हुई थी। लेकिन शिवसेना ने उसे राजनीतिक शिष्टाचार करार दिया। ऐसे में सवाल ये है कि क्या शिवसेना और बीजेपी दोनों अलग अलग रास्ते पर चलेंगे या यह सिर्फ दबाव की राजनीति है।
एनसीपी के नेता नवाब मलिक का कहना है कि जनादेश बीजेपी और शिवसेना के पक्ष में हैं ऐसे में दोनों दलों को मिलकर सरकार बनानी चाहिए। लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो हम निश्चित तौर पर सरकार बनाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से महाराष्ट्र में स्पष्ट जनादेश मिलने के बाद भी बीजेपी और शिवसेना के बीच तनातनी है वो राज्य की भलाई के लिए ठीक नहीं है।
शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि बीजेपी इस गलतफहमी में न रहे कि वो अकेले दम पर बहुमत नहीं जुटा सकते हैं। महाराष्ट्र की जनता ने शिवसेना को सीएम के लिए जनादेश दिया है। चुनाव से पहले बीजेपी की तरफ से जो वादे किए गए थे उसे अब भुलाया जा रहा है। शिवसेना की तरफ से ऐसी कोई डिमांड नहीं की गई है जो नई हो। पार्टी तो वही मांग रही है जिसका वादा किया गया था।

