उल्लेखनीय ने की ऊक्त 759.52 वर्ग मी( 0.202)भूमि पालिका के अभिलेखों के अनुसार वर्ष 1937 में राम सिंह निवासी ग्राम भट्टा से अधिग्रहित की थी जो रिक्शा स्टैंड के लिए थी। क्योंकि उस समय मसूरी आने के लिए ऊक्त रोड का ही उपयोग किया जाता था। जिससे रिक्शा डंडी औऱ पैदल यात्री आते थे।
रघु प्रताप सिंह ने ऊक्त भूमि( 0.202)भूमि की पावर ऑफ अटार्नी विकास चंद्रा के नाम 19 जुलाई 2011 को कर दी
विकास चन्द्र ने 9 सितंबर 2011 को संतोष थापली निवास क्यार कुली को ऊक्त जमीन बेची।फिर ऊक्त जमीन सन्तोष थापली ने 22 अगस्त 2014 को होटल वाइट हाउस के मालिक अनिल दहर को बेच दी।
अब ऊक्त( 0.202) भूमि 28×76 फिट अथार्त 197.67 वर्ग भूमि पर पालिका द्वारा पुलिस महानिरीक्षक भेजे गए पत्र के अनुसार अनिल दहर ने कमरे और पर्किंग बनाई हुई है। इसी भूमि के कुछ भाग में होटल हाई लेंड के मालिक औऱ गोपाल सिंह चौहान द्वारा हाउस औऱ रेम्प बनाकर कब्जा किया हुआ है।
गढ़वाल कमिश्नर को शिकायत मिली थी पालिका की जमीन पर कब्जा अवैध निर्माण कर होटल बनाया गया हैं।
जिसके बाद एसआईटी भूमि सेल ने इस प्रकरण की जांच की. एसआईटी की जांच में ने पुराने दस्तावेज खंगालने के बाद सामने आया कि मसूरी नगर पालिका की उल्लिखित जमीन पर फर्जीवाड़ा किया गया हैं. जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि फर्जी दस्तावेज से नगर पालिका की जमीन पर कब्जा किया गया है. जाँच रिपोर्ट में मुताबिक होटल प्रबन्धक द्वारा प्रश्नगत भूमि के विक्रय पत्र की जांच में सामने आया है कि होटल स्वामी द्वारा कब्जा की गयी पालिका स्वामित्व की भूमि विक्रय पत्र में दर्शायी गयी भूमि का भाग है, जिस कारण विक्रय पत्र कूटरचित प्रतीत होता है. इस पूरे मामले के बाद एक फिर नगर पालिका के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गये है.
वहीं जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि इस मामले को लेकर कार्यवाही हेतु गढ़वाल कमिश्नर के निर्देश हुए हैं और पालिका की तरफ से मुकदमा करवाया जाएगा. स्पष्ट सीमांकन कार्रवाई पूरी करने के लिए टीम गठित की जायेगी.
वहीं नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता का कहना है कि पालिका की भूमि पर किसी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नही किया जायेगा. पालिका की जमीन कब्जा करने वालों पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा.




