शिवसेना ने दिए एनसीपी-कांग्रेस के साथ सरकार बनाने के संकेत, कहा- महाराष्ट्र दिल्ली का गुलाम नहीं

मुंबई: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच तकरार कम होने का नाम नहीं ले रही. राज्य में सरकार बनाने का मामला दिन-ब-दिन उलझता ही जा रहा है. शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने के संकेत दिए हैं. संजय राउत के हवाले से कहा गया कि अब अवस्था ऐसी है कि इस बार महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन होगा? ये उद्धव ठाकरे तय करेंगे. राज्य के बड़े नेता शरद पवार की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. कांग्रेस के कई विधायक सोनिया गांधी से मिलकर आए है. संजय राउत  ने भी सोनिया गांधी से कहा है कि महाराष्ट्र का निर्णय महाराष्ट्र को सौंपे. कुछ भी हो लेकिन दोबारा भाजपा का मुख्यमंत्री न हो, यह महाराष्ट्र का एकमुखी सुर है.

शिवसेना ने सामना के लेख में लिखा है की महाराष्ट्र की राजनीति महाराष्ट्र में ही हो. महाराष्ट्र दिल्ली का गुलाम नहीं है. इतना ही नहीं शिवसेना ने सामना में भाजपा की तुलना हिटलर से कर दी है. शिवसेना ने कहा है पांच साल औरों को डर दिखाकर शासन करनेवाली टोली आज खुद खौफजदा है. ये उल्टा हमला हुआ है.

शिवसेना ने आगे लिखा कि जब डराकर भी रास्ता और समर्थन नहीं मिलता, तब एक बात स्वीकार करनी चाहिए कि हिटलर मर गया है और गुलामी की छाया हट गई है. पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को इसके आगे तो बेखौफ होकर काम करना चाहिए. इस परिणाम का यही अर्थ है.

शिवसेना ने सामना के लेख में लिखा, ” प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री फडणवीस की सराहना की. फडणवीस ही दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे, ऐसा आशीर्वाद दिया परंतु 15 दिन बाद भी फडणवीस शपथ नहीं ले सके क्योंकि अमित शाह राज्य की घटनाओं से अलिप्त रहे.‘युति’ की सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना ढलते हुए मुख्यमंत्री से बात करने को तैयार नहीं है, ये सबसे बड़ी हार है. इसलिए दिल्ली का आशीर्वाद मिलने के बाद भी घोड़े पर बैठने को नहीं मिला.”

दोपहर 12 बजे आदित्य ठाकरे करेंगे विधायकों से बातचीत

जानकारी के मुताबिक शिवसेना विधायकों की दोपहर 12 बजे द रिट्रिट हॉटेलपर में महत्वपूर्ण बैठक होगी. इस बैठक में आदित्य ठाकरे करेंगे विधायकों से बातचीत करेंगे. बैठक में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के मौजुद रहने की संभावना है.

क्यों अटकी बात
शिवसेना और भाजपा लंबे वक्त से गठबंधन में हैं लेकिन इस बार मामला सधता दिख नहीं रहा है क्योंकि शिवसेना 50-50 फॉर्मूले पर अड़ गई है. भाजपा और शिवसेना दोनों ही अपने विधायकों के साथ बैठक कर चुके हैं और कोई भी सीएम पद पर झुकने को तैयार नहीं है.

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