कुलड़ी स्थित एक होटल के सभागार में पत्रकार वार्ता आयोजित कर मजदूर नेता व मसूरी सहकारी श्रमिक समिति के अध्यक्ष भगवान सिंह चौहान ने कहा कि गत रविवार को मसूरी में प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिस फ्री ई वाहन सेवा की घोषणा की है वह पूरी तरह से अव्यवहारिक है. अभी तक इस संबंध में मजदूर संघ और नगरपालिका को भी विश्वास में नही लिया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार इस योजना को लागू करने में जल्दबाजी दिखा रही है, क्योंकि इससे जहाँ रिक्शा श्रमिकों का शोषण होगा, वही मॉल रोड की गरिमा के साथ ही एक अराजकता का माहौल भी कायम हो जायेगा. उन्होंने कहा कि फ्री सेवा किसी भी हाल में सफल नही हो सकती है. वहीं कहा कि पूर्व में जिस तरह से मसूरी विधायक ने भी स्वतंत्रता दिवस पर इसी सम्बन्ध में घोषणा की थी तो उन्होंने रिक्शा चालकों के लिए मानदेय जैसी व्यवस्था करने की बात कही थी, जो कि पूरी तरह से रिक्शा श्रमिकों के साथ अन्याय होगा. सरकार एक ओर स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की बात कहती है और दूसरी ओर ब्रिटिशकाल से पालिका के अधीन स्वरोजगार कर रहे रिक्शा श्रमिकों को मानदेय पर रखने की बात कैसे सोच सकती है. वहीं कहा कि सरकार इस दिशा में सरकार को पालिका के अधिकार क्षेत्र पर अतिक्रमण नही करना चाहिए बल्कि पालिका को ऐसी किसी योजना को शुरू करने में मदद करनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ई रिक्शा संचालन के लिए जो भी प्रक्रिया अपनाने जा रही है, उसे मजदूर संघ और नगर पालिका को भी अवगत करवाया जाय. वहीं उन्होंने कहा कि मिल रही सूचनाओ के अनुसार शासन ने पर्यटकों पर इसके लिए सेस टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर कार्यवाही भी शुरू कर दी है. उन्होंने चिंता व्यक्त की है कि उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करते ही पर्यटकों को अनेक स्थानों पर शुल्क देना होता है. यहाँ तक कि मसूरी सीमा में ईको शुल्क व मॉल रोड के लिए बैरियर शुल्क. इसके बाद एक और टैक्स से पर्यटकों पर बुरा असर पड़ेगा और मसूरी की छवि धूमिल होगी. जिससे पर्यटन पर बुरा प्रभाव देखने को मिलेगा. उन्होंने शासन प्रशासन को चेताते हुए कहा कि इस प्रस्ताव पर पुनः विचार करें ताकि भविष्य में किसी प्रकार के टकराव की स्थिति पैदा न हो.
मजदूर संघ के मंत्री गंभीर पंवार ने कहा है कि अभी तक फ्री रिक्शा सेवा शुरू करने के सम्बन्ध में सरकार की ओर से मजदूर संघ व नगर पालिका को विश्वास में नही लिया गया है. उन्होंने कहा कि मजदूर संघ को आशंका है कि सरकार रिक्शा श्रमिकों को मंदी के अधर पर नियुक्त करने की साजिश कर रही है. उन्होंने कहा कि मसूरी में ब्रिटिशकाल से ही नगर पालिका के अधीन रिक्शा संचालित हुए हैं और नगर पालिका ही इसके लाईसेंस निर्गत करती है. इसलिए नगर पालिका और मजदूर संघ दोनों को विश्वास में लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मजदूर संघ भी चाहता है कि रिक्शाओं में परिवर्तन लाया जाना चाहिए, जिसमे मजदूर संघ सहयोग करने को तैयार है. लेकिन इससे रिक्शा श्रमिकों की रोजी रोटी प्रभावित न हो. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि रिक्शा शर्मिकों के हितो से छेड़छाड़ की गई तो मजदूर संघ व्यापक आन्दोलन शुरू करने को विवश होगा.
मजदूर संघ के पूर्व मंत्री व सीपीआई के शहर सचिव देवी गोदियाल ने कहा कि ब्रिटिश काल से मजदूर स्व रोजगार के तहत रिक्शा चलाते आ रहे हैं. पहले हाथ रिक्शा संचलित होते थे, जिन्हें अकादमी ने उन्मूलन कर साइकिल रिक्शा दिया। जो मजूदर स्व रोजगार कर रहा है, वह नौकरी कैसे कर सकता है. इसे किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं किया जायेगा. उन्होंने यह भी कहा कि बिना नगरपालिका व मजूदूर संघ को विश्वास में लिए बिना ऐसा कोई भी निर्णय उनके अधिकारों को चुनौती देना है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार रिक्शा में परिवर्तन करती है तो इससे पूर्व नगर पालिका व मजदूर संघ को विश्वास में लिया जाना जरूरी है. साथ ही कहा कि जैसे पूर्व में रिक्शा उन्मूलन के तहत रिक्शाओ में परिवर्तन किया गया था, ठीक उसी प्रकार से रिक्शा उन्मूलन किया जाय, ताकि रिक्शा श्रमिकों के हित प्रभावित न हों. उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से फ्री ई रिक्शा संचालन सफल हो ही नही सकते. क्योंकि फ्री सेवा होने पर हर रोज रिक्शा श्रमिकों के साथ मारपीट होने लगेगी व उनका जमकर शोषण होगा. वहीं मॉल रोड की व्यवस्था भी चौपट हो जाएगी. उन्होंने कहा कि मजदूर संघ को इसमें रिक्शा श्रमिकों का अहित दिख रहा है, इसलिए सरकार किसी नतीजे पर पहुँचने से पूर्व इस पर पुनर्विचार करे और मजदूर संघ व नगर पालिका को विश्वास में लें. उन्होंने कहा कि तानाशाही पूर्वक रिक्शा श्रमिकों को लेकर कोई निर्णय लिया जाता है तो उसका व्यापक विरोध किया जायेगा.
इस मौके पर मजूदर संघ के पूर्व अध्यक्ष विरेंद्र सिंह गुगरियाल, बलवंत सिंह नेगी, महिपाल सिंह पंवार, संजय टम्टा, अतर सिंह, हरदेव सिंह पंवार आदि मौजूद रहे।
