दरअसल, विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट कार्यालयों, प्रवासी भारतीयों का संरक्षक कार्यालय, भारतीय सांस्कृतिक संबद्ध परिषद और सचिवालय शाखा आदि के माध्यम से दी जाने वाली मंत्रालय की विभिन्न सेवाओं को राज्यों के स्तर पर ही लोगों को आसानी से उपलब्ध कराने की योजना है। इसके लिए सभी राज्यों की राजधानी में विदेश भवन का निर्माण कराया जा रहा है। इसी के तहत दून में भी विदेश भवन के लिए दो एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई है। विदेश भवन बन जाने से दून में विदेशों से कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो सकेंगे।
यह होगा फायदा
उत्तराखंड से बड़ी संख्या में युवा विदेशों में प्राइवेट सेक्टरों में नौकरी करते हैं। कई बार इनके फर्जी कंपनियों, एजेंटों और गलत दस्तावेजों से ठगे जाने की शिकायतें आती हैं। परिजन दून में विदेश भवन में जाकर ऐसे मामलों की शिकायत कर सकते हैं। जिनका यहीं से समाधान किया जाएगा। इसके अलावा कुछ खास देशों में लेबर वर्क के लिए कम पढ़े-लिखे लोगों को जरूरी दस्तावेज पर नई दिल्ली से विदेश मंत्रालय की मुहर लगानी पड़ती है। लेकिन भवन बनने के बाद दून में ही मुहर लग जाएगी।
पासपोर्ट आवेदकों को होगी आसानी
विदेश भवन में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के अलावा पासपोर्ट सेवा केंद्र भी एक साथ शिफ्ट होंगे। अभी दोनों दफ्तर किराए के भवनों में चल रहे हैं। इन दोनों दफ्तरों की दूरी छह किलोमीटर है। जिससे दस्तावेजों में कुछ दिक्कत आने पर आवेदकों को दोनों दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
विदेश मंत्रालय की ओर से देहरादून में भी विदेश भवन बनाया जाना है। इसके लिए विदेश मंत्री की ओर से मुख्यमंत्री को दो एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इसी क्रम में मेरे स्तर से भी राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया गया है। विदेश भवन बनने से राज्य की जनता को विदेश मंत्रालय से जुड़ी कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
-ऋषि अंगरा, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, उत्तराखंड

