उल्लेखनीय है कि गीता कुमाई का अतिक्रमण का वाद पी,पी,एक्ट में उपजिलाधिकारी मसूरी की कोर्ट में भी चल रहा था। जिसका डिसीजन गीता कुमाई के पक्ष में आने के बाद गीता कुमाई ने हाई कोर्ट से स्टे ले लिया जिसको देखते हुए शासन ने गीता कुमाई के सभासद पद के अंहर्त किये जाने के अपने आदेश को हाई कोर्ट के अगले आदेशो तक स्थगित कर दिया है।
बता दे कि गीता कुमई के पति भरत कुमाई का नगर पालिका की भूमि पर अतिक्रमण का मामला ऒर गीता कुमाई का चुनाव में झूठा एफिडेफिट देने के मामले को लेकर केदार चौहान ने हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी।जिसका संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने उत्तराखंड शासन को आदेश जारी किए थे।कि गीता कुमाई ने पालिका की भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया हुआ है।
अतः शासन ने गीता कुमाई पर नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 40(ख) के अंतर्गत कार्यवाही कर कोर्ट को अवगत कराए। शासन में नगरपालिका अधिशासी अधिकारी औऱ जिला अधिकारी के द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के आधार पर गीता गीता कुमाई के द्वारा किये गए अतिक्रमण को सही मानते हुए नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 40 (ख) के अंतर्गत कार्यवाही करते हुए गीता कुमई की वार्ड नम्बर 8 से पालिका सभासद की सदस्यता को निरस्त कर दिया था।
बरहाल शासन के वार्ड नम्बर 8 के पद को रिक्त घोषित किये जाने के अपने आदेश को अगले आदेशो तक स्थागित करने के बाद गीता कुमाई को शासन की औऱ से बड़ी राहत मिलने के बादअब गीता कुमाई मंसूरी पालिका परिषद की बोर्ड बैठकों में भाग ले सकती है।

