देहरादून। पदोन्नति में आरक्षण को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश के सभी विभागों में लंबित पदोन्नतियों के खुलने व इसके सापेक्ष रिक्त होने वाले पदों पर भर्तियों की राह भी खुलती नजर आ रही है।
उत्तराखंड में बीते मई माह से विभागों में पदोन्नति रुकी हुई थीं। अधिकांश विभागों में पदोन्नति के बाद ही निचले पद खाली होने थे, जिन पर भर्ती की जानी थी। इनकी संख्या तकरीबन 20 हजार के आसपास मानी जा रही है। हालांकि, सही आंकड़ा जुटाने के लिए कार्मिक विभाग सभी विभागों से विस्तृत जानकारी लेने की तैयारी कर रहा है।
प्रदेश सरकार ने बीते सितंबर माह में प्रदेश में सभी विभागों में डीपीसी बैठकों को स्थगित करते हुए पदोन्नति प्रक्रियाओं पर रोक लगा दी थी। इसका आधार हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण के मसले को लेकर चल रहे मुकदमों को बताया गया।कोर्ट में चल रहे इन मुकदमों का सबसे अधिक असर नौकरी की राह ताक रहे युवाओं और सेवानिवृति की दहलीज पर खड़े कार्मिकों पर पड़ा।
दरअसल, प्रदेश के विभिन्न विभागों में निचली श्रेणी के अधिकांश पद सीधी भर्ती के हैं। इनके उपर के पदों पर भी आधे पद सीधी भर्ती तो आधे पदोन्नति के जरिये भरे जाते हैं। वर्ष 2018 में सरकार ने जब ऐसे पदों की गणना की थी तब इनकी संख्या 26 हजार आंकी गई थी।
हालांकि, इसके बाद इनमें से कुछ पदों पर तो भर्ती हुई लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हुए हैं। इनमें राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, परिवहन, वन विभाग, वन निगम, सिंचाई विभाग, खाद्य-आपूर्ति, आबकारी, उद्योग व आयुष आदि समेत 40 विभागों के पद शामिल हैं। अपर सचिव कार्मिक सुमन सिंह वाल्दिया ने कहा कि कोर्ट का फैसला आने के बाद अब जल्द डीपीसी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विभागों से भी पदोन्नति के सापेक्ष रिक्त होने वाले पदों का ब्योरा लिया जाएगा।

