मसूरी, पर्यटन नगरी मसूरी में अन्य राज्यों से रोजी रोटी की तलाश में हर वर्ष सैकड़ो मजदूर निर्माण कार्य होटल दुकानों में काम करने आते है।
एक माह से अधिक लॉक डाउन होने के कारण सैकड़ो की तादात में मजदूर मसूरी में फंसे हुए हैं।
जिनके सामने अपने पेट भरने की समस्या लगातार बनी हुईं हैं। जिसके चलते वो या तो शासन प्रशासन औऱ स्वयंसेवी संस्थाओं के भरोसे जिन्दा हैं।
पेट भरने के साथ साथ उन्हें अपने परिवार की चिन्ता भी सताने लगी हैं।
लॉक डाउन में ढील होते ही उन्हें अपने घर जाने की उम्मीद जगी है।
एक माह से अधिक लॉक डाउन होने के कारण सैकड़ो की तादात में मजदूर मसूरी में फंसे हुए हैं।
जिनके सामने अपने पेट भरने की समस्या लगातार बनी हुईं हैं। जिसके चलते वो या तो शासन प्रशासन औऱ स्वयंसेवी संस्थाओं के भरोसे जिन्दा हैं।
पेट भरने के साथ साथ उन्हें अपने परिवार की चिन्ता भी सताने लगी हैं।
लॉक डाउन में ढील होते ही उन्हें अपने घर जाने की उम्मीद जगी है।
वैसे तो सरकार लॉक डाउन में फंसे मजदूरों को उनके गन्तव्य तक भेजने का काम कर रही हैं।लेकिन दिन प्रतिदिन मजदूरों के हौसले पस्त होते जा रहे हैं।
जिसका दर्द शराब के ठेके खुलने के बाद मजदूर शराब पी कर चौक चौराहों पर निकालते हुए दिखाई दे रहे है।
सरकार को चाहिए कि जितनी जल्दी हो सके इन मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुचाने का काम करे। नही तो ये मजदूर ऐसे ही शराब पी कर लॉक डाउन का उल्लंघन करते नजर आएंगे। जिसके कारण मसूरी के आम निवासियो को भी कोरोना वाइरस से पीड़ित होने का खतरा बढ़ सकता है।
