हरिद्वार I गंगा की अविरलता के लिए छह महीने से अनशन कर रहे मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा कि 27 अप्रैल को जल त्यागने के बाद यदि उनकी जान जाती है तो इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा कि ये मेरा अंतिम वीडियो होगा।
मालूूम हो कि मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद पिछले साल 24 अक्टूबर से अनशन कर रहे हैं। इस दौरान प्रशासन ने उन्हें कई बार जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद भी उन्होंने अनशन नहीं तोड़ा।
वह अभी तक अनशन करने के साथ जल ले रहे थे। अब उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वह 27 अप्रैल से जल भी त्याग देंगे। उन्होंने कहा कि अनशन के 6 महीने के अंतराल के दौरान शासन प्रशासन स्तर पर वार्ता का कोई प्रयास नहीं किया गया।
गंगा की रक्षा करना जितना उत्तर भारतीय का कर्तव्य है, उतना ही दक्षिण भारतीय का भी। एक दक्षिण भारतीय होने के नाते वे गंगा की रक्षा अंतिम सांस तक करेंगे।
मंगलवार को उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा है कि यदि जल त्यागने के बाद यदि उनकी मौत होती है तो इसके जिम्मेदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, हरिद्वार के जिलाधिकारी दीपक रावत और हरिद्वार के पूर्व एसडीएम मनीष कुमार सिंह होंगे।
मातृसदन ने ठुकराई प्रशासन की अपील
मंगलवार को उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा है कि यदि जल त्यागने के बाद यदि उनकी मौत होती है तो इसके जिम्मेदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, हरिद्वार के जिलाधिकारी दीपक रावत और हरिद्वार के पूर्व एसडीएम मनीष कुमार सिंह होंगे।
मातृसदन ने ठुकराई प्रशासन की अपील
मातृसदन ने ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के अनशन को समाप्त करने की प्रशासन की अपील को ठुकरा दिया है। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने स्पष्ट किया कि यदि शासन स्तर का कोई अधिकारी आता है तो उनसे इस मामले में वार्ता की जा सकती है।
मंगलवार को एसडीएम कुशुम चौहान मातृसदन पहुंची और स्वामी शिवानंद से वार्ता की। उन्होंने ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का अनशन समाप्त करवाने की अपील की। स्वामी शिवानंद ने कहा कि शासन और प्रशासन गंगा के दर्द के प्रति उदासीन बना हुआ है। गंगा की रक्षा के लिए अनशन कर रहे संत का सम्मान नहीं किया जा रहा है।
मंगलवार को एसडीएम कुशुम चौहान मातृसदन पहुंची और स्वामी शिवानंद से वार्ता की। उन्होंने ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का अनशन समाप्त करवाने की अपील की। स्वामी शिवानंद ने कहा कि शासन और प्रशासन गंगा के दर्द के प्रति उदासीन बना हुआ है। गंगा की रक्षा के लिए अनशन कर रहे संत का सम्मान नहीं किया जा रहा है।
प्रशासन चाहता तो बच जाती सानंद की जान
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि 9 अक्टूबर 2018 को नेशनल मिशन फॉर क्लिन गंगा (एनएमसीजी) ने भोगपुर से बिशनपुर कुंडी तक खनन पर रोक लगा दी थी, लेकिन प्रशासन ने इस आदेश को दबाकर रखा। जिससे यह सिद्ध होता है कि स्वामी सानंद की हत्या की गई, जिसमें शासन प्रशासन और खनन माफिया शामिल हैं। यदि प्रशासन जागा होता और इस आदेश को स्वामी सानंद को दिखाया होता तो आज वे जिंदा होते।
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि एनएमसीजी ने जिला अधिकारी को खनन बंद करने का आदेश दिया था। एनएमसीजी के आदेश के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आदेश प्रभावहीन हो गया था। जिलाधिकारी को एनएमसीजी के आदेश का सीधे तौर पर पालन करना था लेकिन उन्होंने आदेश का अनुपालन करने के लिए अपने उच्च अधिकारियों से अनुमति मांगी। 21 दिसंबर को सुनवाई भी हुई, लेकिन प्रशासन की तरफ से उसमें कोई नहीं आया। उन्होंने धन बल के आधार पर सीपीसीबी के आदेश को मॉडिफाई करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के सचिव पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि 9 अक्टूबर 2018 को नेशनल मिशन फॉर क्लिन गंगा (एनएमसीजी) ने भोगपुर से बिशनपुर कुंडी तक खनन पर रोक लगा दी थी, लेकिन प्रशासन ने इस आदेश को दबाकर रखा। जिससे यह सिद्ध होता है कि स्वामी सानंद की हत्या की गई, जिसमें शासन प्रशासन और खनन माफिया शामिल हैं। यदि प्रशासन जागा होता और इस आदेश को स्वामी सानंद को दिखाया होता तो आज वे जिंदा होते।
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि एनएमसीजी ने जिला अधिकारी को खनन बंद करने का आदेश दिया था। एनएमसीजी के आदेश के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आदेश प्रभावहीन हो गया था। जिलाधिकारी को एनएमसीजी के आदेश का सीधे तौर पर पालन करना था लेकिन उन्होंने आदेश का अनुपालन करने के लिए अपने उच्च अधिकारियों से अनुमति मांगी। 21 दिसंबर को सुनवाई भी हुई, लेकिन प्रशासन की तरफ से उसमें कोई नहीं आया। उन्होंने धन बल के आधार पर सीपीसीबी के आदेश को मॉडिफाई करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के सचिव पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

