नई दिल्ली । अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल ने सील बंद लिफ़ाफ़े मे अपनी अंतरिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। कल रिपोर्ट पर कोर्ट चर्चा कर सकता है। पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ मामले की सुनवाई करेगी।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के ज़रिए सुलझाने के लिए भेजा था। पक्षकारों की ओर से सुझाए गए नामों पर विचार करने के बाद तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल गठित किया है। कोर्ट ने रिटायर्ड जज की अध्यक्षता मे तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल गठित किया था। कोर्ट ने साथ ही पैनल को जरूरत पड़ने पर अन्य सदस्यों को भी शामिल करने की छूट दी है। कल पता चलेगा कि मध्यस्थता मे क्या हुआ।
मध्यस्थता की पहल
सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधानपीठ ने राम जन्मभूमि विवाद का बातचीत के जरिये आपसी सहमति से हल निकालने के लिए गत 1 मार्च को मामला मध्यस्थता को भेज दिया था। कोर्ट ने तीन सदस्यों का मध्यस्थता पैनल बनाया था जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश एफएम इब्राहिम कलीफुल्ला को अध्यक्ष व आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर व वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू को सदस्य नियुक्त किया था। कोर्ट ने आठ सप्ताह में मध्यस्थता के जरिए सुलह के रास्ते तलाशने को कहा था।
फैजाबाद में ही मध्यस्थता
कोर्ट ने मध्यस्थता की सफलता सुनिश्चित करने के लिए इसे फैजाबाद में करने का आदेश दिया था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार से इसके लिए तत्काल सभी जरूरी इंतजाम करने को कहा था ताकि मध्यस्थता एक सप्ताह में शुरू हो जाए। इन्तजाम में मध्यस्थता की जगह, मध्यस्थों के ठहरने,आने जाने और सुरक्षा आदि शामिल थी।
मध्यस्थता प्रक्रिया गोपनीय
कोर्ट ने आदेश दिया था कि मध्यस्थता इन कैमरा होगी और उसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए उसमें पूरी तरह गोपनीयता बरती जाएगी। मध्यस्थता के दौरान पक्षकारों और यहां तक कि मध्यस्थ द्वारा रखे गए विचारों को भी गोपनीय रखा जाएगा और किसी भी व्यक्ति को इसकी जानकारी नहीं दी जाएगी।
मीडिया न करे मध्यस्थता की रिपोर्टिग
कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता प्रक्रिया की इलेक्ट्रानिक या प्रिंट मीडिया में रिपोर्टिग नहीं होनी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिग पर रोक लगाने का कोई आदेश पारित नहीं किया लेकिन मध्यस्थता पैनल को जरूरत पड़ने पर रिपोर्टिग रोकने के लिए आदेश पारित करने की छूट दी है।
चार सप्ताह में मांगी थी प्रगति रिपोर्ट
कोर्ट ने पैनल से तय समय आठ सप्ताह में मध्यस्थता पूरी करने को कहा था साथ ही मध्यस्थता शुरू होने के चार सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। पीठ ने मध्यस्थता पैनल के अध्यक्ष से कहा था कि अगर उन्हें इस काम में कोई दिक्कत पेश आती है तो वह सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को उसके बारे में सूचित कर सकते हैं। कोर्ट ने उनसे जल्दी से जल्दी काम पूरा करने को कहा था।
क्या है मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में फैसला देते हुए विवादित जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। कोर्ट ने जमीन को रामलला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बांटने का आदेश दिया था साथ ही साफ किया था कि रामलला विराजमान को वही हिस्सा दिया जाएगा जहां वे विराजमान हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले को सभी पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से फिलहाल मामले में यथास्थिति कायम है।

