स्मृति की आंधी में उड़ गए राहुल गांधी, ढह गया कांग्रेस का पुराना किला

नयी दिल्ली। छोटे पर्दे की हर दिल अजीज बहू ‘तुलसी’ और ‘गांधी परिवार’ के गढ अमेठी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली स्मृति ईरानी ने एक बड़ा उलटफेर करके राजनीति के गलियारों में अपना कद काफी ऊंचा कर लिया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पिछली बार राहुल से अमेठी में एक लाख से अधिक मतों से हार गई थी। इस बार फिर उसी संसदीय क्षेत्र से भाजपा ने उन्हें टिकट दिया और पिछले पांच साल से अमेठी में सक्रिय ईरानी ने गांधी से उस हार का बदला ले लिया। राहुल ने औपचारिक नतीजे घोषित होने से पहले ही अपनी हार स्वीकार करते हुए प्रेस वार्ता में स्मृति को जीत की बधाई भी दे डाली। ईरानी ने अपनी जीत के बाद ट्वीट करके दुष्यंत कुमार की कविता की पंक्तियां लिखी,‘‘ कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता।’’ राहुल के हार का एक बड़ा कारण यह बी कहा जा रहा है कि उनके वायनाड जाने से अमेठी के लोग खुद को उपेक्षित समझने लगे थे। 

राजनीतिक विश्लेषकों का तो यह भी कहना है कि अमेठी में अपनी हार की सुगबुगाहट पाने के बाद ही गांधी ने केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ने का फैसला किया था। पिछली बार चुनाव हारने के बावजूद उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया और बाद में वह सूचना प्रसारण और फिर कपड़ा मंत्री रही। ईरानी को उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर या बतौर मंत्री कार्यकाल में कई विवादों का सामना करना पड़ा। अपने नामांकन पत्र में उन्होंने कहा था कि वह स्नातक नहीं है। वहीं 2014 चुनाव में उन्होंने कहा था कि वह 1994 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं जिससे उनके दावे की विश्वसनीयता को लेकर विवाद पैदा हो गया था । विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि वह स्नातक नहीं है। 

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