स्टोर में सामान का हिसाब अधूरा मिला, पशु बाजार की व्यवस्था पर भी उठे सवाल, कहां गया पालिका के सामान का पूरा हिसाब?
रामनगर: नगर पालिका रामनगर में सोमवार कोकुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने छापा मारा. इस औचक निरीक्षण से अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति देखने को मिली. कमिश्नर ने नगर पालिका के स्टोर से लेकर ऊंट पड़ाव स्थित स्लॉटर हाउस और पशु बाजार तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया.
स्टोर में खरीदी गई सामग्री का रिकॉर्ड तो मिला, लेकिन सामान किसे और कितनी मात्रा में दिया गया, इसका व्यवस्थित ब्यौरा मौके पर उपलब्ध नहीं कराया जा सका. वहीं पशु बाजार में पशुओं की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड और निर्धारित प्रक्रिया को लेकर भी कमिश्नर ने सवाल उठाए. निरीक्षण के बाद कई बिंदुओं पर जांच और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.
नगर पालिका में कमिश्नर दीपक रावत का छापा: कमिश्नर दीपक रावत ने सबसे पहले नगर पालिका के स्टोर का निरीक्षण किया. उन्होंने स्टोर में रखी सामग्री के साथ उससे जुड़े दस्तावेजों की जानकारी ली. निरीक्षण के दौरान डस्टबिन, चूना, ब्लीचिंग पाउडर और झाड़ू समेत अन्य सामग्री की खरीद से संबंधित जानकारी अधिकारियों ने उपलब्ध कराई. लेकिन सवाल उस समय खड़ा हुआ जब खरीदी गई सामग्री के वितरण का रिकॉर्ड मांगा गया. कमिश्नर के मुताबिक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि नगर पालिका ने कितना सामान खरीदा और उसमें से किसे कितनी मात्रा में वितरित किया गया.
स्टोर में सामान का हिसाब मिला अधूरा: स्टोर में रिकॉर्ड को लेकर सामने आई कमी पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि सरकारी धन से खरीदी जाने वाली प्रत्येक सामग्री का खरीद से लेकर वितरण तक पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से रखा जाना चाहिए. उन्होंने स्टोर के दस्तावेजों और रजिस्टर को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए. मामले में नैनीताल जिलाधिकारी को तथ्यपरक जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं. जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रिकॉर्ड में कमी के लिए कौन जिम्मेदार है और आगे क्या कार्रवाई की जानी है.
पशु बाजार की व्यवस्था पर भी उठे सवाल: स्टोर के निरीक्षण के बाद कमिश्नर ऊंठ पड़ाव स्थित स्लॉटर हाउस और पशु बाजार पहुंचे. यहां उन्होंने पशुओं की खरीद-बिक्री से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी ली और मौके पर मौजूद लोगों से भी जानकारी प्राप्त की. कमिश्नर ने पशुओं से संबंधित रिकॉर्ड, आवश्यक अनुमति और स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेजों के बारे में जानकारी मांगी. निरीक्षण के दौरान इन व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए गए.
कहां गया पालिका के सामान का पूरा हिसाब? कमिश्नर ने कहा कि पशुओं की खरीद-बिक्री निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए और इससे जुड़े जरूरी दस्तावेज एवं रिकॉर्ड उपलब्ध होना आवश्यक है. उन्होंने नगर पालिका को मामले में पुलिस को तहरीर देने के निर्देश दिए हैं, ताकि निरीक्षण में सामने आए तथ्यों की जांच की जा सके. साथ ही संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की बात कही गई है. कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि जांच में यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
मुकदमा दर्ज करने के आदेश, ईओ की सैलरी रोकी: साथ ही कमिश्नर ने पशु बाजार के निरीक्षण के दौरान मौके पर एक पिकअप वाहन में तीन भैंसें लदी हुई पाई. इसको गंभीरता से लेते हुए उन्होंने तत्काल वाहन व जानवरों को कब्जे में लेने के साथ ही संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध पशु क्रुरता के तहत मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए. कुमाऊं कमिश्नर ने नगर पालिका ईओ आलोक उनियाल का वेतन रोकने के साथ ही स्टोर कीपर प्रमोद कुमार, टीएस शिखा और इस पूरे प्रकरण में संलिप्त नगर पालिका के कर्मचारियों पर जांच के आदेश दिए.
पारदर्शी व्यवस्था और रिकॉर्ड रखने का निर्देश: निरीक्षण के दौरान नगर पालिका के कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था को लेकर भी कमिश्नर ने जानकारी ली. उन्होंने पर्यावरण मित्रों की शत-प्रतिशत बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. इसके अलावा नगर पालिका की प्लास्टिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था की भी समीक्षा की गई. प्लास्टिक कचरे की तौल, उसके रिकॉर्ड और निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों से जानकारी मांगी गई. कमिश्नर ने व्यवस्था को पारदर्शी और रिकॉर्ड आधारित रखने के निर्देश दिए.
जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर: यानी एक ही निरीक्षण में नगर पालिका के स्टोर से लेकर पशु बाजार और कचरा प्रबंधन तक कई व्यवस्थाएं कमिश्नर की जांच के दायरे में आईं. अब नैनीताल जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के स्तर से होने वाली जांच के बाद ही यह तस्वीर साफ होगी कि रिकॉर्ड में मिली कमियों और व्यवस्थाओं के लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है. रामनगर नगर पालिका में हुए इस औचक निरीक्षण ने नगर पालिका की व्यवस्थाओं और रिकॉर्ड संधारण को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं. अब जांच के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट पर नजर रहेगी. खास तौर पर स्टोर में सामान के वितरण का रिकॉर्ड, पशु बाजार की प्रक्रिया और कर्मचारियों की उपस्थिति से जुड़े मामलों में क्या तथ्य सामने आते हैं और किसकी जिम्मेदारी तय होती है, यह देखना अहम होगा.
