लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को करारी हार क्या मिली कि उसके दिन धीरे-धीरे लदने शुरू हो गए हैं। 130 साल पुरानी पार्टी का यह हश्र होगा किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था। चुनावों में हार जीत लगी रहती है लेकिन हार के बाद भी हार मानकर बैठ जाना, यह लोगों के गले नहीं उतर रहा है। लोग अब यह सवाल पूछना शुरू कर दिए हैं कि आखिरकार कांग्रेस के नेता कर क्या रहे हैं? राहुल गांधी को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिए हुए लगभग पचास दिन बीत गए। फिर भी कांग्रेस को नया अध्यक्ष नहीं मिल पाया। कांग्रेस नेतृत्व की इस विकल्पहीनता पर पार्टी के अंदर से भी आवाजें उठने लगी हैं। पहले वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह और फिर बाद में जनार्दन द्विवेदी अध्यक्ष पद के चुनाव पर हो रही देरी पर अपना असंतोष जाहिर कर चुके हैं।
कार्यसमिति से राहुल की गुहार उत्तराधिकारी का चयन जल्द करें
राहुल गांधी ने सीडब्ल्यूसी से यह गुहार लगाई थी कि उनके उत्तराधिकारी का चयन जल्द से जल्द किया जाए। लेकिन वह अभी तक नहीं हो पाया। हां, इतना जरूर देखा गया कि उल्टा सीडब्ल्यूसी राहुल गांधी से ऐसा न करने की गुहार लगाती रही। फिर भी राहुल गांधी नहीं माने। कई मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्रियों ने राहुल गांधी को मनाने की कोशिश की। फिर भी वो अपने फैसले से टस से मस नहीं हुए। कई तरह की खबरें भी आईं कि फलां का नाम कांग्रेस अध्यक्ष पद से रेस में सबसे आगे चल रहा है, लेकिन किसी के नाम पर अभी तक फैसला नहीं हो पाया।
‘हम अध्यक्ष बनकर करेंगे क्या?’
कई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तो यह मानते हैं कि हम अगर अध्यक्ष पद ले भी लें, तो हमको क्या मिलने वाला है? उल्टा हमको सत्ताधारी पार्टी की जलालत ऊपर से झेलनी पड़ेगी। हम केवल गांधी परिवार के पिछलग्गू ही बनकर रहेंगे। हम कभी खुलकर काम भी नहीं कर पाएंगे। दरअसल, कांग्रेस गांधी परिवार के बिना अंधूरी है। कांग्रेस में गांधी परिवार की इजाजत के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता है। अब इस पर भी सवाल हो रहे हैं कि अगर ऐसा है तो राहुल गांधी ढोंग क्यों कर रहे हैं? कांग्रेस में अगर सब कुछ सही तरीके से नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं कि कांग्रेस का जिक्र केवल इतिहास में ही होगा।

