यहां महज 500 रुपये के लिए 100 की रफ्तार से दौड़ती है ‘मौत’, कई लोगों की जान ले चुके ये ‘यमदूत’

देहरादून I देहरादून में गुरुवार को डंपर से कुचलकर हुई छात्रा की मौत के बाद शहर में उबाल है। लेकिन हैरत की बात यह है कि शिमला बाईपास पर मौत के नाम से कुख्यात हो चुके डंपरों को चालक 100 की रफ्तार से दौड़ाते हैं। कारण यह है कि उन्हें प्रति चक्कर 500 रुपये मिलते हैं।
लिहाजा, ज्यादा से ज्यादा फेरे लगाने के चक्कर संकरे मार्ग को डंपरों की रेस का ट्रैक बन गया है। इसी रेस में आए दिन इस सड़क पर हादसे हो रहे हैं। बीते एक साल में शिमला बाईपास पर हुए हादसों में करीब 24 लोगों की मौत हो चुकी है।

बाईपास पर आलम यह है कि डंपरों को देखकर लोगों में दहशत भरी हुई है। छोटे बच्चे हों या फिर बुजुर्ग, सभी इन्हें मौत के नाम से बुलाते हैं। जो हादसे दिन के उजाले में होते हैं वे सुर्खियां बन जाते हैं, लेकिन न जाने कितने छोटे बडे़ हादसे रात के अंधेरे में होते हैं। 
इनमें से कुछ लोगों का तो यही नहीं पता चलता कि उन्हें कौन टक्कर मारकर चला गया। जांच होती है तो पता चलता है कि रात में वे किसी डंपर का ही शिकार हुए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि डंपर चालकों में जल्दी फेरे लगाने में होड़ लगी रहती है, इसके चलते यहां हर दिन छोटे बड़े हादसे होते हैं।

इन डंपरों में नदियों से खनन सामग्री लाई जाती है। एक चक्कर के लिए डंपर चालक को 500 रुपये मिलते हैं। ज्यादा फेरे लगाने के चक्कर में चालक डंपरों को बेतहाशा दौड़ते हैं।

कहने को तो शिमला बाईपास पर डंपरों और भारी वाहनों के लिए केवल छह घंटे की एंट्री है। रात 11 बजे के बाद सुबह पांच बजे तक ही डंपर और भारी वाहन शिमला बाईपास रोड पर चल सकते हैं।

लेकिन, मृत्युदूत बने डंपर यहां 24 घंटे धमाचौकड़ी मचाते हैं। बृहस्पतिवार को जिस डंपर से हादसा हुआ वह भी सुबह चार बजे नया गांव चौकी के सामने से निकला था, लेकिन बीच में अपने मालिक के घर रुक गया। 

इंस्पेक्टर सूर्यभूषण नेगी ने बताया कि जिस डंपर से हादसा हुआ उसके चौकी पर सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए हैं। यह डंपर सुबह चार बजे चौकी के सामने से निकला था। चूंकि, उस वक्त एंट्री रहती है तो उसे नहीं रोका गया।
इसके बाद वह आगे जाकर अपने मालिक शहीद के घर पेलियो में रुक गया और वहां से उसे बड़ोवाला में खनन सामग्री आठ जे डालनी थी। इसके लिए वह पेलियो से सुबह सात बजे निकला था। इस तरह डंपर चालक ने पुलिस को भी चकमा दिया।

इसी तरह डंपर वाले जानबूझकर ट्रंकों को चेकिंग प्वाइंट के आगे पीछे रात में रोक लेते हैं। फिर दो चेकिंग प्वाइंट के बीच में ही फेरे लगाते हैं। यही कारण है कि पुलिस की पकड़ में भी यही बात नहीं आती है। ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि जब पुलिस को इस बारे में पता है तो इस सब पर रोक लगाने के लिए अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? 

दरअसल, शहर में सेंट ज्यूड्स चौराहे पर नो एंट्री का बोर्ड टंगा हुआ है। इसके बाद इस तरह का एक बोर्ड नया गांव चौकी के पास भी लगा हुआ है। बोर्ड पर लिखा है कि यहां सुबह पांच बजे से रात 11 बजे तक डंपर व भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है।

लेकिन, इन बोर्ड का न तो डंपर चालकों पर कोई असर है और न ही इनकी लाज पुलिस रखती है। हर दिन डंपर यहां फॉर्मूला वन जैसी रेस लगाते हैं। बता दें कि बाईपास पर डंपरों और भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंधित समय की व्यवस्था तीन साल पहले तत्कालीन एसएसपी डॉ. सदानंद दाते के आदेशों के बाद की गई थी।

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