काशीपुर में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने निजी अस्पतालों और क्लीनिकों पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी छापेमारी की है.
रुद्रपुर: काशीपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से व्यापक अभियान चलाया. इस अभियान का नेतृत्व एसडीएम अवय प्रताप सिंह और नगर स्वास्थ्य अधिकारी अमरजीत सिंह ने किया. टीम ने शहर के आधा दर्जन से अधिक निजी हॉस्पिटल और क्लीनिकों का औचक निरीक्षण किया.
जांच के दौरान कई स्वास्थ्य संस्थान निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे. निरीक्षण टीम को कई जगह गंभीर अनियमितताएं देखने को मिलीं, जिसके चलते मौके पर ही कार्रवाई करते हुए दो अस्पतालों पर बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियमों के उल्लंघन के तहत 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बायो-मेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण न करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है. निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कुछ हॉस्पिटल और क्लीनिक बिना फायर विभाग की अनिवार्य एनओसी के संचालित हो रहे थे. इस पर प्रशासन ने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित संचालकों को जल्द से जल्द आवश्यक अनुमति लेने के निर्देश दिए.
इसके अलावा कई स्थानों पर जनरेटर को अस्पताल परिसर के बाहर रखा गया था, जो सुरक्षा मानकों के खिलाफ पाया गया. प्रशासन ने साफ निर्देश दिए कि सभी संस्थान अपने जनरेटर को तत्काल परिसर के भीतर स्थापित करें. ऐसा न करने की स्थिति में नगर निगम की टीम इन्हें अतिक्रमण मानते हुए जब्त करने की कार्रवाई कर सकती है. अधिकारियों ने कहा कि नियमों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.इस अभियान में तहसीलदार पंकज चंदौला, नगर स्वास्थ्य अधिकारी अमरजीत सिंह, दमकल विभाग के कर्मचारी, एसएनए विनोद लाल, लिपिक रविंद्र मेहरा सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे. टीम ने अस्पताल संचालकों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो और कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
नगर स्वास्थ्य अधिकारी अमरजीत सिंह ने बताया कि यह अभियान एक बार की कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाएगा. इसके लिए विशेष टीम का गठन किया गया है, जो सप्ताह में दो से तीन दिन नियमित रूप से अस्पतालों और क्लीनिकों की जांच करेगी.प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से निजी स्वास्थ्य संस्थानों में हड़कंप मचा हुआ है. वहीं आम जनता इसे एक सकारात्मक कदम के रूप में देख रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है.
