फेक न्यूज फैलाने वालों की अब ‘खैर’ नहीं, सोशल मीडिया अकाउंट्स से आधार को लिंक करने की तैयारी

नई दिल्ली : सोशल मीडिया में फेक न्यूज के चलन पर रोक लगाने के लिए सरकार ठोस उपाय करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर घृणित सामग्रियों एवं फेक न्यूज के प्रसार पर रोक लगाने के लिए यूजर्स के प्रोफाइल को उसके आधार संख्या से जोड़ने की जरूरत है। अटार्नी जनरल ने कहा कि इससे सोशल मीडिया पर देश विरोधी, आतंकवाद, फेक न्यूज, अपमानजनक और पोर्नोग्राफिक सामग्री फैलाने वाले व्यक्ति की पहचान करने के साथ ही उसे जवाबदेह ठहराया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट भी वेणुगोपाल के सुझाव पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हुआ है। शीर्ष न्यायालय का कहना है कि यह अपराध की पहचान के लिए आवश्यक है।
बता दें कि सोशल मीडिया अकाउंट्स को आधार नंबर से जोड़ने को अनिवार्य बनाने पर आदेश जारी करने के लिए बॉम्बे और एमपी हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं के खिलाफ फेसबुक और वाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शीर्ष न्यायालय में इस केस की सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल ने ये टिप्पणी की।
अटार्नी जनरल ने कहा कि देश विरोधी, आतंकवाद फैलाने वाली सामग्री, फेक न्यूज, मानहानि एवं पोर्नोग्राफिक कंटेंट के प्रसार पर रोक लगाने के लिए जितना जल्दी हो सके यूजर्स के सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को उनके आधार नंबर के साथ जोड़ने की जरूरत है। ऐसा करने पर इस तरह की सामग्रियां फैलाने वाले व्यक्ति की पहचान और उसे जवाबदेह ठहराया जा सकेगा। वेणुगोपाल ने कहा कि इस तरह की सामग्रियों को पहली बार सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले व्यक्ति की पहचान करना जरूरी है। 

फेसबुक ने कहा है कि वह किसी थर्ड पार्टी के साथ आधार नंबर शेयर नहीं कर सकता क्योंकि वाट्सअप की मैसेजिंग दो लोगों के बीच होती है और इस मैसेंजिंग पर उनकी भी पहुंच नहीं है। जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरूद्ध बोस की पीठ ने कहा कि वे इस केस की सुनवाई मंगलवार को करेंगे। वेणुगोपाल ने कहा कि मद्रास हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई काफी आगे बढ़ चुकी है और इस पर 18 सुनवाई हो चुकी है। वहीं, फेसबुक की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि सवाल यह है कि आधार संख्या को एक निजी कंपनी के साथ साझा किया जाना या नहीं।

उन्होंने कहा कि एक अध्यादेश में यह बात कही गई है कि व्यापक जन हित के सवाल पर आधार को निजी कंपनी के साथ साझा किया जा सकता है। रोहतगी ने कहा, ‘देश के अलग-अलग हाई कोर्ट आधार को निजी कंपनियों के साथ साझा करने पर अलग-अलग फैसले सुना रहे हैं। ऐसे में यह उचित होगा कि इन सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया जाए। यहां तक कि इन जनहित याचिकाओं में भी कमोबेश यही बात होती है।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *