नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था हिचकोले खा रही है या सही सलामत ट्रैक पर है इसे लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हैं। सरकार का कहना है कि जिस तरह से विपक्ष हो हल्ला मचा रहा है वो तथ्यों से परे है। वैश्विक स्तर पर उतार चढ़ाव का थोड़ा बहुत असर है। लेकिन उससे निपटने के लिए सरकार की तरफ से उपायों की घोषणा की गई है।
राहुल गांधी की ट्वीट के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। वो कहती हैं कि जिस तरह से सही कैच पकड़ने के लिए खेल की सच्ची भावना जरूरी है, नहीं तो तो आप सारा दोष ग्रेविटी, ओला और उबर पर मढ़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वैश्विक फैक्टर का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती है।
अब सवाल ये है कि ग्रेविटी और ओला उबर शब्द इतना ज्यादा चर्चा में क्यों है। दरअसल केंद्र सरकार के जिम्मेदार मंत्रियों से यह सवाल पूछा जाता है कि जनाब अर्थव्यवस्था की सेहत के बारे में बताइए। कुछ ऐसा ही सवाल रेल मंत्री पीयूष गोयस से पूछा गया और उसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह कोई मैथ नहीं और आइंस्टीन को ग्रेविटी के सिद्धांत का जनक बता दिया। ये बात अलग है कि उन्होंने मुंबई के एक कार्यक्रम में कहा कि गलती सबसे हो जाती है और उनसे स्लिप ऑफ टंग हो गया। इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि ओला और उबर लोगों की पसंद बन चुके हैं और उसकी वजह से कारों की बिक्री पर असर पड़ा है।
जब ओला-उबर और कारों की बिक्री के संबंध में जवाब तलाशे गए तो ये पता चला कि जिन शहरों में ये दोनों सेवाएं उपलब्ध हैं वहां कारों की बिक्री पर असर नहीं है। इस सिलसिले में राहुल गांधी ने कहा था कि अब सरकार को यह मान लेना चाहिए कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे गलत फैसले किए गए और उसका असर अब दिखाई दे रहा है। आज अर्थव्यस्था बुरे दौर से गुजर रही है और यह बेहतर होगी की सरकार नई शुरुआत करे।

