देहरादून. कोरोनो वायरस की महामारी के बीच उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग की खबरें सोशल मीडिया पर चल रही हैं. इसको लेकर उत्तराखंउ के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मुझे यह कहते हुए बड़ा दुख हो रहा है कि सोशल मीडिया पर कई नामी-गिरामी हस्तियां “उत्तराखंड जल रहा है” जैसे एक भ्रामक दुष्प्रचार का हिस्सा बनी हैं. आप सभी से इतनी अपेक्षा है कि अपने नाम का इस तरह से दुरुपयोग न होने दें.
पुलिस ने दी थी ये चेतावनी
इन खबरों को लेकर पुलिस भी चेतावनी दे चुकी है. अशोक कुमार (महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड) ने बताया कि चीन और चिली देश के जंगलों में लगी आग (वर्ष 2016 और 2017) की पुरानी तस्वीरों को सोशल मीडिया में पोस्ट कर दिखाया जा रहा है कि उत्तराखंड के जंगलों में आग बढ़ती जा रही है, जो सत्य से एकदम परे है. कृपया ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और ऐसी भ्रामक खबरों से सावधान रहें. ऐसी भ्रामक और असत्य खबरों को सोशल मीडिया में प्रचारित/प्रसारित करने वालों के विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत कर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
सोशल मीडिया पर चल रही है ये खबर
इन दिनों सोशल मीडिया पर लोग उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग की चर्चा कर रहे हैं और इस साल अब तक 46 बार जंगलों में आग लगने का दावा किया जा रहा है. हालांकि हर साल बढ़ते तापमान के कारण जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं. जबकि अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार पहली घटना की सूचना के बाद से जंगल की आग ने 51.34 हेक्टेयर क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया है. रिपोर्ट में आगे कहा गया कि कुमाऊं क्षेत्र में आग लगने की 21 घटनाएं सामने आईं, जबकि गढ़वाल और आरक्षित वन क्षेत्रों में क्रमश: 16 और 9 मामले दर्ज किए गए. यही नहीं, राज्य में आग से घिरे वनस्पतियों और जीवों के बारे में बताते हुए, कई निवासियों ने हैशटैग #PrayForUttarakhand के साथ वाइल्डफायर के वीडियो और फोटो ट्वीट किए, जो जल्द ही ट्रेंडिंग टॉपिक बन गया.

