त्रिवेंद्र सरकार का लिटमस टेस्ट होगा पिथौरागढ़ उपचुनाव, भाजपा खेल सकती है सहानुभूति का कार्ड

देहरादून I उत्तराखंड में ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाने की जोड़तोड़ में जुटी सत्तारूढ़ भाजपा के सामने अब पिथौरागढ़ विधानसभा उपचुनाव की चुनौती भी आ गई है।

पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के निधन से खाली हुई इस सीट पर ये उपचुनाव ठीक ऐसे वक्त में हो रहा है, जब सत्ता पर काबिज त्रिवेंद्र सरकार के तीन साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है। इस लिहाज से राजनीतिक प्रेक्षक इस उपचुनाव को त्रिवेंद्र सरकार के कामकाज के लिटमस टेस्ट की तरह भी देख रहे हैं।

हालांकि उपचुनाव की उम्मीदवारी को लेकर भाजपा को अभी अपने पत्ते खोलने हैं, लेकिन पार्टी के भीतर से जो सूचनाएं आ रही हैं, वो बता रही हैं कि चुनावी समर में भाजपा सहानुभूति के कार्ड का ही इस्तेमाल करेगी।

यही प्रयोग पार्टी थराली विधानसभा के उपचुनाव में कर चुकी है, जिसमें उसे कामयाबी मिली थी। इस उपचुनाव में पार्टी स्वर्गीय पंत के परिवार के सदस्य को प्रत्याशी बना सकती है। पार्टी के पास पंत परिवार में से प्रत्याशी बनाए जाने के लिए दो चेहरे हैं।

एक स्वर्गीय पंत की पत्नी चंद्रा पंत, जो शिक्षिका हैं और दूसरे पंत के छोटे भाई भूपेश पंत। भूपेश संगठन की भाजपा की सांगठनिक राजनीति से सीधे तो कभी जुड़े नहीं रहे, लेकिन बड़े भाई के चुनाव प्रचार में वे मुख्य रणनीतिकारों में रहे हैं।

जैसे कि संकेत आ रहे हैं कि स्वर्गीय प्रकाश पंत की पत्नी चुनाव लड़ने की इच्छुक नहीं हैं, इसलिए भूपेश को प्रत्याशी बनाए जाने की ज्यादा संभावनाएं हैं। हालांकि अभी पार्टी को प्रत्याशी की घोषणा करनी है। ये कार्य प्रदेश संगठन की सिफारिश पर केंद्रीय नेतृत्व को करना है। 

भाजपा के पास प्रदेश में बेशक विधानसभा में प्रचंड बहुमत है, लेकिन इस उपचुनाव को वह कतई हल्के में नहीं लेना चाहेगी। सियासी जानकार उपचुनाव को भाजपा और त्रिवेंद्र सरकार की साख और प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहे हैं। त्रिवेंद्र सरकार अपना आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी है और अब भाजपा का शीर्ष नेतृत्व 2022 के विधानसभा चुनाव का नारा देने लगा है, इस लिहाज से पिथौरागढ़ का समर उसके लिए और भी अहम हो गया है।

सियासी जानकारों की मानें तो ये उपचुनाव प्रदेश सरकार के कामकाज का लिटमस टेस्ट होगा। यदि पार्टी चुनाव जीती तो भाजपा के पास अपनी बाद ज्यादा ताकत के साथ कह सकेगी कि विकास के मोर्चे पर वह सही दिशा में है। यदि परिणाम प्रतिकूल रहा तो ये विपक्ष को ही नहीं पार्टी के भीतर असंतुष्ट खेमे को आक्सीजन देने का काम करेगा। यही वजह है कि भाजपा प्रत्याशी चयन से लेकर उपचुनाव लड़ने तक में कोई कमजोरी नहीं छोड़ना चाहेगी।  

मैं चुनाव लड़ने को तैयार हूं: भूपेश पंत
पिथौरागढ़ विधानसभा सीट से स्वर्गीय प्रकाश पंत के छोटे भाई भूपेश पंत उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। अमर उजाला ने जब उनसे चुनाव लड़ने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि यदि भाजपा उन्हें प्रत्याशी बनाएगी तो वे अवश्य चुनाव लड़ेंगे। 

देवर के लिए नहीं लड़ूंगी चुनाव: चंद्रा पंत
पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय प्रकाश पंत की पत्नी चंद्रा पंत का कहना है कि अपने देवर के लिए वे उपचुनाव नहीं लड़ेंगी। वे अपने देवर को उम्मीदवार बनाए जाने का समर्थन कर रही हैं। अमर उजाला ने उनसे जब यह पूछा कि क्या वे चुनाव लड़ेंगी, तो उन्होंने कहा कि पारिवारिक कारणों की वजह से वह चुनाव नहीं लड़ेंगी। उनका देवर चुनाव लड़ेगा। 

भाजपा की चुनाव को लेकर हमेशा से ही तैयारी रहती है। उपचुनाव में प्रत्याशी की घोषणा केंद्रीय नेतृत्व करेगा। चूंकि समय कम है, इसलिए घोषणा जल्द होने की संभावना है। ये उपचुनाव भाजपा भारी मतों से जीतेगी।
-डॉ. देवेंद्र भसीन, प्रदेश मीडिया प्रमुख, भाजपा

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