‘एक देश, एक चुनाव’ के लिए सभी पार्टियों की सहमति जरूरी, ये तुरंत नहीं हो रहा- सुनील आरोड़ा

नई दिल्ली: एक देश एक चुनाव को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील आरोड़ ने शनिवार को बड़ा बयान दिया. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि देश में एक साथ लोकसभा-विधानसभा के चुनाव या एक देश, एक चुनाव बहुत जल्द नहीं होने वाला है. उन्होंने कहा कि ये तब तक नहीं हो सकता जब तक सभी राजनीतिक दल एक साथ बैठक कर आम सहमति नहीं बनाते.

निरमा विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में सुनील आरोड़ा ने कहा कि देश में 1967 तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं. 1967 के बाद व्यवस्था में असंतुलन आया. उन्होंने कहा, ”हां हमें भी यह व्यवस्था सही लगेगी, मैं महज इतना कह रहा हूं कि हमलोग सैद्धांतिक रूप से इस पर सहमत हैं.” उन्होंने कहा कि यह तब तक नहीं हो सकता, जब तक कि राजनीतिक दल साथ बैठ कर सर्वसम्मति पर नहीं पहुंच जाते हैं और कानून में जरूरी संशोधन नहीं लाया जाता है.



बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी एक देश एक चुनाव की बात कह चुके हैं, इसके लिए सरकार की ओर से प्रयास भी किए जा रहे हैं. इस मुद्दे पर पीएम मोदी की अध्यक्षता में 19 जून को एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई थी. बैठक में पीएम ने सभी दलों के प्रमुखों को आमंत्रित किया था, लेकिन कई दलों ने इसका बहिष्कार किया.

बैठक में क्या हुआ?
बैठक की बाद सरकार की ओर से बताया गया कि ज्यादातर पार्टियों ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का समर्थन किया है. जिसके बाद इस मुद्दे पर सभी पक्षों के साथ विचार करने के लिए एक समिति गठित की जाएगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी समिति गठित करेंगे, जो निश्चित समय-सीमा के अंदर सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श करके अपनी रिपोर्ट देगी.

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