नागरिकता संशोधन बिल: शाह बोले- किसी के साथ अन्याय नहीं होगा,कांग्रेस ने बिल को बताया असंवैधानिक

नई दिल्ली। विपक्ष के भारी विरोध के बीच नागरिकता संशोधन बिल सोमवार को लोकसभा में पेश हो गया। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बिल को पेश किया। विधेयक को पेश किए जाने के लिए विपक्ष की मांग पर मतदान करवाया गया और सदन ने 82 के मुकाबले 293 मतों से इस विधेयक को पेश करने की स्वीकृति दे दी। बिल पर अभी चर्चा चल रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर अपनी बात रखी।
कांग्रेस की तरफ से मनीष तिवारी इस बिल के विरोध में बोले। उन्होंने इस बिल को असंवैधानिक, गैरसंवैधानिक और संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया। मनीष तिवारी ने कहा है कि नागरिकता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और CAB समानता का उल्लंघन करता है। संविधान धार्मिक भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 15, अनुच्छेद 21, अनुच्छेद 25 और 26 के खिलाफ है। यह विधेयक असंवैधानिक है और समानता के मूल अधिकार के खिलाफ है।

लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा, ‘इस बिल के हिसाब से किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। बिल के पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। बिल हमारी संस्कृति को परिभाषित करता है। कोई यूं ही अपना देश नहीं छोड़ता है। देश छोड़िए गांव नहीं छोड़ता है। कोई प्रताड़ित होता है, अपमानित होता है, इसलिए देश छोड़ता है। 70 साल से जिनके साथ अन्याय हुआ है, ये बिल उनके साथ न्याय करेगा।’
गृह मंत्री ने कहा, ‘कांग्रेस साबित करे कि बिल किसी के साथ अन्याय करता है। धर्म के आधार पर किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। अपने बॉर्डर की सुरक्षा करना हमारा कर्तव्य है। 1947 में जितने भी शरणार्थी आए सभी भारतीय संविधान द्वारा स्वीकार किए गए, शायद ही देश का कोई ऐसा क्षेत्र होगा जहां पश्चिम और पूर्वी पाकिस्तान के शरणार्थी नहीं बसते थे। मनमोहन सिंह जी से लेकर लालकृष्ण आडवाणी जी तक, सभी इसी श्रेणी के हैं।’
विपक्ष को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि लोग पूछ रहे हैं कि आजादी के बाद इस बिल की जरूरत क्यों पड़ी। इस सवाल का जवाब स्पष्ट है कि अगर कांग्रेस ने धर्म के आधार देश के बंटवारे में हिस्सा न बनी होती तो इस बिल की जरूरत ही नहीं पड़ती। सच तो ये है कि इस बिल की आवश्यकता कांग्रेस की वजह से पड़ी है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस बिल के जरिए सरकार देश के अल्पसंख्यकों के हितों पर हमला करने जा रही है। लेकिन उनके आरोपों पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह बिल अल्पसंख्यकों के .001 फीसद खिलाफ नहीं है। 
लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह बिल अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में उन हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी और जैन के लिए हैं जिन्हें धार्मिक प्रताणना का शिकार होना पड़ा। इस बिल के जरिए उन लोगों को नागरिकता हासिल हो जाएगी। इस तरह के आरोपों में दम नहीं है कि इस बिल के जरिए मुस्लिमों के अधिकार वापस ले लिए जाएंगे। 

स्पीकर ओम बिड़ला ने ओवैसी से कहा कि आप इस तरह की असंसदीय भाषा का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही से इस बयान को निकाल दिया जाएगा।  

चर्चा में हिस्सा लेते हुए एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि स्पीकर साहब आप से यह अर्जी है कि देश को इस कानून से बचाइए इसके साथ ही गृहमंत्री को भी नहीं तो जिस तरह से नुरेमबर्ग रेस लॉ और इजराइल की नागरिकता अधिनियम की तरह गृहमंत्री का नाम भी हिटलर और डेविड गुरियन के साथ लिया जाएगा।

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