कार्यों का भी वर्णन है । इस अवसर पर लेखक प्रदीप भण्डारी ने कहा कि आज फेसबुक , व्हाट्सएप तथा मोबाइल के भारी प्रचलन से नई पीढी पुस्तकों और विशेष कर साहित्य लेखन व पाठन से दूर होती जा रही है । व्यक्ति बौद्विक रूप से पराधीन होता जा रहा है । हर व्यक्ति में कल्पना और रचना की असीमित शक्ति होती है । जो साहित्य या लेखन के रूप में सामने आती है तो वह समाज की पूंजी बन जाती है । नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का काम करती है । इस पुस्तक को प्रकाशित करने का लक्ष्य यह है कि नई पीढ़ी का साहित्य पढ़ने व लिखने की तरफ रूचि बढ़े तथा पुस्तक इस दिशा में प्रेरणा बनें । साहित्य गहरा असर डालता है तथा वहत समय तक विद्यमान रहता है । रचनात्कता व्यक्ति के चरित्र निर्माण को उत्तम बनाती है । इस अवसर पर फिल्म अभिनेता गम्भीर सिंह जयाड़ा , कान्ता प्रसाद , प्रसिद्ध संगीतकार संजय कुमोला , अनुज जोशी , लोक गायक जितेन्द्र पंवार , लोक गायक पदम गुसॉई . डा० अमरदेव गोदियाल , मसूरी व्यापार संघ के अध्यक्ष रजत अग्रवाल , हिलदारी के सयांजेक अरविन्द शुक्ला , आन्दोलनकारी देवेश्वर प्रसाद जोशी , शूरवीर भण्डारी , पूरण जुयाल , कमल भण्डारी , माधुरी नौटियाल , राज्य श्री रावत , तहमना , ममता राव , भरोसी रावत , संतोष बौथियाल . कमलेश भण्डारी समेत

