नागरिक संशोधन बिल पर बड़ा सवाल, ईसाइयों को नागरिकता मिलेगी तो मुसलमानों को क्यों नहीं ?

नई दिल्ली: लोकसभा में अमित शाह के भाषण में विरोधियों के मन में उठते एक-एक सवाल का जवाब था. गृह मंत्री ने संसद के जरिये भरोसा दिलाने की कोशिश की कि बिल को लेकर उठते सवालों में कोई दम नहीं है. अमित शाह ने देश के मुसलमानों को भी विश्वास दिलाया कि सरकार उनके साथ है. नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर लोगों के अंदर अभी बहुत सारे सवाल हैं. हमने कोशिश की है कि उन बड़े सवालों को पांच हिस्सों में बांट कर उसका जवाब आपको दें.

सवाल- ईसाईयों को नागरिकता मिलेगी तो मुसलमानों को क्यों नहीं ?
जवाब- बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा- अगर हिंदुस्तान भी हिंदुओं को शरण नहीं देगा तो फिर वो कहां जाएंगे. मैं गिन रही थी कि कितने देश हैं जो इस्लामिक हैं तो मैं हैरान हुई. ऐसे देश 40 के करीब हैं. मैं गिन रही थी कितने ऐसे देश हैं जहां ईसाई धर्म है, वो भी 40 के आसपास हैं. फिर मैंने गिनना चाहा कि कितने देश का धर्म हिंदू है तो एक भी नहीं. मीनाक्षी लेखी के इस बयान से पहला सवाल और पुख्ता हो जाता है. जब 40 देश धार्मिक तौर पर ईसाई देश माने जाते हैं फिर ईसाईयों को भारत की नागरिकता देने का कानून है लेकिन मुसलमानों को नहीं.

बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाक शामिल म्यांमार, भूटान क्यों नहीं ?
अमित शाह ने इसका जवा दिया- तीन देश जिनसे हमारी सीमा जुड़ती है, उन देशों के 6 समुदायों को हम नागरिकता देंगे क्योंकि उनके देश में उनके साथ प्रताड़ना हुई है.

श्रीलंका के तमिल शरणार्थियों को भी नागरिकता मिलेगी क्या ?
तमिल शरणार्थियों को लेकर जवाब गृह मंत्री अमित शाह ने दिया और कहा कि शास्त्री-भंडारनाइके समझौते के तहत श्रीलंका के तमिलों को पहले ही नागरिकता मिल चुकी है.

नेपाल में मधेशियों पर अत्याचार फिर वो बिल से अलग क्यों ?
सरकार ने इसका भी जवाब दिया. अमित शाह ने कहा इंडो- नेपाल समझौता 1950 के मुताबिक नेपाल के नागरिकों के साथ कोई भेदभाव नहीं होता है. वो नागरिकता भी हासिल कर सकते हैं और यहां संपत्ति भी खरीद सकते हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल, क्या मुसलमानों को देश छोड़ना होगा ?
इसका जवाब बहुत साफ है, कल अमित शाह ने कई बार इसका जवाब दिया. उन्होंने कहा- इस देश के किसी मुसलमान को इस बिल से कोई वास्ता नहीं. ये बिल बाहर से आने वाले 6 समुदाय के शरणार्थियों से जुड़ा है.

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