(देखिए विडियो)वन विभाग की मिलीभगत से भू माफियाओं के हो रहे हैं हौसले बुलंद लॉक डाउन में बेरोकटोक पहाड़ो का दोहन कर जारी है अवैध निर्माण,,,,,,

मसूरी,5,जून पहाड़ो की रानी मसूरी में जहाँ एक ओर कोरोना वाइरस के ख़ौफ़ से लोग घरों से भी निकलने से कतरा रहे है।

वही अवैध निर्माण करने वालो के इस महामारी में भी हौसले बुलंद है।एक ऐसा ही मामला मसूरी में दूधली गाँव मे देखने को मिला। दुधली में वन विभाग की मिली भगत से  एक रसूखदार भू माफिया बेरोकटोक पहाड़ो का दोहन कर वन विभाग से मिलीभगत कर एंगल आयरन स्ट्रक्चर की अनुमति ले कर बेरोकटोक अवैध निर्माण कर रहा है।

इस वारे में जब मसूरी वन छेत्राधिकारी से जानकारी ली तो उन्होंने अनुमति के बाबत यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया कि वह ऊक्त रसूखदार भू माफिया की निजी (नाप भूमि)  काश्त भूमि है। वहाँ पर कोई भी वन कानून लागू नही होता। हालांकि उन्होंने दबे शब्दो मे ये माना कि वन विभाग की अनुमति ले कर ऊक्त रसूखदार भू माफिया जो वहाँ पहाड़ो का दोहन कर निर्माण कर रहा है वो गलत ही नही गैरकानूनी है। लेकिन ऊक्त पर कोई कानूनी कार्यवाही करने से वो कतराते रहे।
अब सवाल ये उठता है ।कि जहाँ एक ओर कोई आम व्यक्ति 2 कमरों के निर्माण के लिए वन विभाग या संबंधित विभाग से अनुमति लेने के लिए जाते हैं।तो विभाग द्वारा सो तरह के कानूनी पेंच बता कर गरीब आदमी को रफादफा कर दिया जाता है।वही  दुधली में ऊक्त रसूखदार भू माफिया को वन विभाग ने कैसे अनुमति दे दी।ये वन विभाग की मिलीभगत की और सीधे तौर पर उँगली उठाने के लिए काफी हैं।
 बता दे जहाँ ये सब गड़बड़ घोटाला चल रहा है ठीक उससे लगता  हुआ वन छेत्र विनोग हिल भद्राज   राजाजी नेशनल पार्क में आता है।इसी छेत्र में विलुप्त प्रजाति की हिमालयन कवेल भी देखी गई हैं।

बहरहाल वन विभाग ऊक्त रसूखदार भू माफिया पर कोई भी कार्यवाही करने से कतरा रहा है। हालांकि मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने ऊक्त भू माफिया का संबंधित धराओं में चालान भी काट कर काम रूकवाने की बात कर रहा है।अब देखना ये हैं उक्त भू माफिया कब तक बेरोकटोक निर्माण जारी रखता है। औऱ सम्बंधित विभाग उसके विरुद्ध कोई कार्यवाही कर भी पाता है ।या नही ।

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