कोरोना से संदिग्ध इटली की नागरिक एम्स में भर्ती, ग्रीस से लौटी युवती को देख गांव में मचा हड़कंप

ऊधमसिंह नगर I उत्तराखंड के ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला के पास कोरोना से संदिग्ध इटली से आई महिला को देख लोगों में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महिला को तुरंत एम्स में भर्ती कराया। महिला को अभी आईसोलेशन वार्ड में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि मामला संदिग्ध है, इसलिए महिला के ब्लड सैंपल पुणे जांच के लिए भेजे जाएंगे। 

जानकारी के अनुसार, महिला 29 फरवरी को ऋषिकेश घूमने आई थी। उस दौरान उसने लक्ष्मण झूला के पास होटल में कमरा लिया था। वहां बारिश में भीगने के कारण उन्हें खांसी और जुकाम की शिकायत हो गई। इसके चलते जब डॉक्टरों को दिखाया तो कुछ कोरोना वायरस जैसे लक्षण मिले। इसके बाद विभागीय टीम ने महिला को एम्स में भर्ती कराया।

उधर, सितारगंज में ग्रीस से घूमकर लौटी युवती को देखते ही कोरोना वायरस के संदेह से गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी। वहीं, सूचना मिलते ही खुफिया एजेंसी, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम युवती के घर पहुंची और थर्मल स्कैनिंग की। 

युवती ने बताया कि उसे दिल्ली में दो बार जांच के बाद ही घर भेजा गया है। दरोगा हरविंदर कुमार ने बताया कि युवती बिजटी गांव की रहने वाली है। पांच महीने पहले वह ग्रीस की राजधानी एथेंस घूमने गई थी। 

बता दें कि शनिवार को जापान से लौटे आईआईटी रुड़की के छात्र को कोरोना वायरस का संदिग्ध मरीज मानते हुए मेला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था। छात्र के ब्लड सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेज दिए गए हैं। अगले 72 घंटे तक वह विभाग की निगरानी में ही रहेगा।

प्राइवेट लैब नहीं लेंगे कोरोना वायरस के सैंपल 

उत्तराखंड सरकार ने जानलेवा कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर उत्तराखंड एपिडेमिक डिजीज कोविड-19 रेग्युलेशन एक्ट 2020 को लागू कर दिया है। शासन ने एक्ट की अधिसूचना जारी कर दी है। प्राइवेट लैबों में जांच के लिए कोरोना वायरस के सैंपल लेने को प्रतिबंधित किया गया है। सरकार की ओर से चयनित अस्पतालों व प्रयोगशालाओं में ही सैंपल लिए जाएंगे। 

शासन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य स्तर पर सचिव स्वास्थ्य, महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और जिले स्तर पर जिलाधिकारी या सचिव स्वास्थ्य की ओर से नामित अधिकारी को कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए अधिकार दिए गए हैं। अधिनियम में व्यवस्था की गई कि सभी सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए अलग से वार्ड बनाया जाएगा। संदिग्ध मरीज की जांच के समय मरीज की यात्रा की जानकारी के साथ ही वायरस से प्रभावित व्यक्ति संपर्क में आया या नहीं इसका भी पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। 

किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण पाए जाते हैं तो उसे 14 दिन तक घर में रखा जाएगा। वायरस से पीड़ित पाए जाने पर अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड  में रखा जाएगा। एक्ट में यह भी व्यवस्था की गई कि किसी क्षेत्र में कोरोना वायरस फैलने की स्थिति से निपटने के लिए टास्क फोर्स बनाई जाएगी। टास्क फोर्स की अनुमति से बचाव कार्य किए जाएंगे। 

एक्ट में ये भी व्यवस्था

– कोरोना वायरस फैलने की स्थिति में क्षेत्र विशेष को सील किया जा सकता है। 
– प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश निषेध करने के साथ ही वहां से बाहर आने पर रोक लगाई जा सकती है।
– स्कूल व कार्यालय जहां लोग एकत्रित होते हैं, उन्हें बंद किया जा सकता है।
– वाहनों के संचालन पर रोक लगाई जा सकती है।
– कोरोना वायरस के मामलों के सघन जांच का सर्वे।
– संदिग्ध मरीजों को आईसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा।
– सरकारी भवन को मरीजों को रखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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