देहरादून। बल्लीवाला फ्लाईओवर पर सरकार को कितनी और मौतों का इंतजार है? करीब साढ़े तीन साल में इस खूनी फ्लाईओवर पर अब तक 15 युवाओं की मौत हो चुकी है और सिस्टम अब भी इंतजार की मुद्रा में है। हाईकोर्ट के आदेश पर लोनिवि ने फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर यहां पर एक और डबल लेन फ्लाईओवर की संभावना जरूर तलाशी, मगर इसके निर्माण पर शासन ने यह कहकर हाथ खींच दिए हैं कि उनके पास बजट ही नहीं है। यही वजह है कि एक के बाद एक लोग इस पर जान गंवा रहे हैं और सरकार लोगों की सुरक्षा की खातिर 110 करोड़ रुपये का बजट जुटाने में असहाय नजर आ रही है।
अगस्त 2016 में जब यह फ्लाईओवर बनकर शुरू हुआ, तभी इस बात की आशंका भी तेज हो गई थी कि यह यातायात के लिए सुरक्षित नहीं है। क्योंकि फोरलेन में पास किए गए फ्लाईओवर का जबरन दो लेन में निर्माण करा दिया गया। अधिकारियों ने यह जानते हुए भी इसमें सुधार नहीं किया कि फ्लाईओवर पर तीव्र मोड़ भी है और इसका संकरापन हादसों का सबब बनेगा। जब फ्लाईओवर पर हादसे बढ़ने लगे तो राजमार्ग खंड के अधिकारियों ने सेफ्टी ऑडिट भी कराया।
इसकी कुछ संस्तुतियों के आधार पर फ्लाईओवर को फाइबर डिवाइडर लगाकर दो भागों में भी बांटा गया। हालांकि, फ्लाईओवर के संकरेपन को दूर न करने के चलते इसके बाद भी हादसे होने से हाईकोर्ट ने मई 2018 में फ्लाईओवर को फोर लेन करने या बगल में एक और फ्लाईओवर निर्माण पर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तलब की थी। यह रिपोर्ट भी बनाई गई और तय किया गया कि बल्लूपुर चौक से बल्लीवाला की तरफ आते हुए दायीं तरफ एक और डबल लेन फ्लाईओवर बनाया जा सकता है।
इसकी लागत जमीन अधिग्रहण को मिलाकर करीब 110 करोड़ रुपये बैठ रही है। यह रिपोर्ट पिछले साल शासन को भेजी जा चुकी थी और हाईकोर्ट को भी इसकी प्रति भेजकर अधिकारियों ने खानापूर्ति कर दी। क्योंकि जब बात उठी कि एक और डबल लेन फ्लाईओवर के निर्माण को स्वीकृति कब मिलेगी, तब शासन ने टका सा जवाब दे दिया कि इसके लिए बजट ही नहीं है। अफसोस कि दिसंबर तक फ्लाईओवर पर 15 जान गंवाने के बाद भी शासन यही कह रहा है कि यहां पर एक और डबल लेन फ्लाईओवर बनाया जाना किसी भी सूरत में संभव नहीं है।
इसलिए जरूरी है एक और फ्लाईओवर
महज डबल लेन फ्लाईओवर पर दोनों तरफ के वाहन गुजरते हैं। ऐसे में एक तरफ महज सिंगल लेन होने के चलते मोड़ वाले हिस्से पर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। यदि यहां पर एक और फ्लाईओवर बन जाए तो एक फ्लाईओवर से एक ही दिशा वाले वाहन गुजरेंगे और यातायात सुगम हो पाएगा।
सरकार को 110 करोड़ की चिंता
बल्लीवाला का खूनी फ्लाईओवर महज तीन साल में 15 युवाओं की जिंदगी लील चुका है और शासन को सिर्फ 110 करोड़ रुपये की चिंता सता रही है। बेढ़ंगे और संकरे फ्लाईओवर के बगल में एक और डबल लेन फ्लाईओवर के निर्माण के लिए शासन ने 110 करोड़ रुपये का इंतजाम करने से हाथ खड़े कर दिए थे। मई 2018 हाईकोर्ट के आदेश पर ही लोनिवि ने एक और डबल लेन फ्लाईओवर निर्माण की संभावना टटोलते हुए शासन को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसे अपर मुख्य सचिव (लोनिवि) ओम प्रकाश नकार चुके हैं।
हालांकि, खूनी फ्लाईओवर पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर अप्रैल 2018 में जब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वयं बल्लीवाला फ्लाईओवर का निरीक्षण किया तो उन्होंने सुरक्षा के लिए हरसंभव विकल्प अपनाने के निर्देश लोनिवि अधिकारियों को दिए थे। इसमें एक और डबल लेन फ्लाईओवर के निर्माण व मौजूदा फ्लाईओवर के डिजाइन में बदलाव जैसे विकल्प भी थे। यह बात और है कि अधिकारियों ने मुखिया के निर्देशों को सुनकर भी अनसुना कर दिया।

